समलैंगिकता के मुद्दे पर कल सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, एएम खानविल्कर, डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की संवैधानिक पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अब भारत में दो वयस्कों के बीच सहमति से बनाए गए संबंध कानूनी अपराध नहीं होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 के तहत समलैंगिक संबंध के प्रावधानों को गैरकानूनी करार दिय। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समलैंगिक व्यक्तियों को भी सम्मान से जीने का अधिकार है।
इस आदेश में समझने वाली बात है कि धारा 377 को पूरी तरह से खत्म नहीं किया गया है क्योंकि इस में सिर्फ दो वयस्कों के बीच समलैंगिक संबंध ही नहीं बल्कि अन्य कई मुद्दे भी आते हैं। हालांकि अभी भी अगर कोई व्यक्ति जानवर, बच्चों से किसी प्रकार का अप्राकृतिक संबंध बनाता है तो उसपर धारा 377 के तहत ही मामला दर्ज किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि गे, लेस्बियन, बाय-सेक्सुअल, ट्रांसजेंडर को अन्य नागरिकों के समान जीने का अधिकार है। वह किसी तरह का अपराध नहीं कर रहे हैं।
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