
आज सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ आधार की अनिवार्यता को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुनाएगी। केंद्र सरकार ने आधार योजना का बचाव करते हुए कहा कि जिनके पास आधार नहीं है उन्हें भी किसी वंचित नहीं रखा जाएगा। केंद्र ने कहा कि डेटा सुरक्षित है और इसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता है और आधार समाज के कमजोर और हाशिए वाले वर्गों के अधिकारों की रक्षा करता है। साथ ही केंद्र ने यह भी तर्क दिया की आधार ने सरकार के राजकोष में 55000 करोड़ रुपये बचाए हैं।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि आधार निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है। ये मानव जीवन को प्रभावित करता है। यह कानून के रूप में नहीं रह सकता है। इस मामले में 10 मई को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख दिया था। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण की संविधान पीठ ने सुनवाई की थी।
फैसला आने तक सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के अलावा बाकी सभी केंद्र व राज्य सरकारों की योजनाओं में आधार की अनिवार्यता पर रोक लगाई गई है।
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