
राफेल जेट की डील को भारत में सियासत गर्म हैं, यही हाल फ्रांस में भी है, फ्रांस केे पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के उस बयान के बाद तो मामला ओर गर्मा गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि डील के दौरान रिलायंस कंपनी का नाम भारत सरकार ने ही सुझाया था। अब इस पूरे मामले पर एक भारतीय न्यूज चैनल ने फ्रांस के वर्तमान राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों से राफेल डील को लेकर सवाल पूछना चाहा तो उन्होंने सीधे तौर पर इस बात का जवाब देने से इंकार कर दिया।
भारतीय न्यूज चैनल के हवाले से आई खबर के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पत्रकार इमैनुअल मैक्रों के साथ बातचीत कर रहे थे, तभी एक भारतीय मीडिया हाऊस (न्यूज चैनल) के पत्रकार ने इमैनुअल मैक्रों से सीधे इस संबंध में सवाल पूछा कि पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद द्वारा दावा किया गया है कि भारत सरकार ने अनिल अंबानी के रिलायंस डिफेंस को भारत के साथी के रूप में लेने के लिए फ्रांसीसी सरकार या राफेल के निर्माता दासॉल्ट को नाम का प्रस्ताव दिया था ।
इमैनुअल मैक्रों ने अपनी प्रतिक्रिया में सीधे आरोपों का कोई जवाब नहीं दिया, बल्कि बात का दो टूक जवाब देते हुए कहा कि मैं उस समय सत्ता में नहीं था। पिछले साल मई में इमैनुअल मैक्रों फ्रांस के राष्ट्रपति चुने गए थे। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल 2016 में राफेल जेट डील की घोषणा की थी। उस समय फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद थे।
गौरतलब है कि देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी राफेल डील में भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही है। कांग्रेस का कहना है कि फ्रांस से की गई 36 विमानों की डील को तीन गुना से ज्यादा की कीमत में किया गया है। जबकि, यूपीए के शासन काल में यह डील 570 करोड़ प्रति विमान के हिसाब से हुई थी, जबकि एनडीए सरकार ने पुरानी डील रद्द करके प्रति विमान 1500 करोड़ से ज्यादा की दर पर 36 विमानों का सौदा तय किया है।
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