Monday, November 19, 2018

जेकेके में रात भर चला भारतीय शास्त्रीय संगीत का जादू

गत दो संस्करणों में मिले उत्साहजनक रूझान को देखते हुए जयपुर के जवाहर कला केंद्र (जेकेके) में शनिवार को ओवर नाइट क्लासिकल म्यूजिक कंसर्ट ‘राग‘ के तीसरे संस्करण का आयोजन किया गया। मनमोहक संगीत से भरपूर इस कार्यक्रम का आनंद लेने जयपुर और अन्य शहरों के लगभग 500 संगीत प्रेमी रात्रि 10 बजे जेकेके के मध्यवर्ती पहुंचे।


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कार्यक्रम में पं. आनिंदो चटर्जी, उस्ताद राशिद खान, डॉ. जयंती कुमारेश, उस्ताद वासिफुद्दीन खान डागर, उस्ताद अयान अली बंगश और उस्ताद अमान अली बंगश जैसे भारतीय शास्त्रीय संगीत के विश्वप्रसिद्ध कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियां दी गई।

विदुषी डॉ. जयंती कुमारेश के सरस्वती वीणा वादन के साथ कंसर्ट की शुरूआत हुई। डॉ. जयंती ने सर्वप्रथम कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के राग हंसध्वनि की आदिताल में तिलाना, आलाप, जोड़, झाला द्वारा अनुपम प्रस्तुति दी। ‘केसरिया बालम‘ लोक गीत की अनूठी शास्त्रीय रचना के साथ अपनी प्रस्तुति का समापन किया। डॉ. कुमारेश के साथ मृदंगम पर अर्जुन कुमार और तबले पर अनुब्रत चटर्जी पर थे।

इसके पश्चात् उस्ताद राशिद खान द्वारा ‘जिनके मन राम बसे‘ और ‘याद पिया की आई‘ जैसी बेहतरीन शास्त्रीय रचनाओं के सुमधुर गायन का सभी ने भरपूर आनंद उठाया। उस्ताद अयान अली बंगश और अमान अली बंगाश की सरोद जुगलबंदी को भी संगीत प्रेमियों द्वारा बेहद सराहा गया। इनकी प्रस्तुति में राग रागेश्वरी की प्रस्तुति शामिल थी। इन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध रचना ‘एकला चालो रे‘ भी पेश की।

रात के आगे बढ़ने के साथ पं. आनिंदो चटर्जी के अद्भुत तबला वादन ने श्रोताओं में नवीन ऊर्जा का संचार किया। विश्व प्रसिद्ध ध्रुपद गायक, उस्ताद वासीफुद्दीन खान डागर द्वारा राग भटियारी एवं राग ललित में दी गई मनमोहक प्रस्तुतियों के साथ ओवरनाइट कंसर्ट का समापन हुआ और जयपुर के 291वें स्थापना दिवस का आगाज हुआ।



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