
भारत 1947 में भारत पंडित नेहरु और सरदार पटेल के अथक प्रयासों के कारण ही एक हुआ था जो आजादी के बाद विभिन्न रियासतों में बिखरा हुआ था। वो सरदार पटेल ही थे जिनकी भू-राजनीतिक सूझ-बुझ के कारण छोटी-बड़ी 562 रियासतों को भारतीय संघ में समाहित कर दिया था। यही कारण है सरदार पटेल को “भारत का बिस्मार्क और लौह पुरूष” भी कहा जाता है। लेकिन कुछ ऐसे भी प्रांत थे जहाँ उपनिवेशी जड़े इस कदर गहरी थी की आजादी के बहुत सालो तक वो प्रांत भारत का हिस्सा नहीं थे उसमे से एक था गोवा, जहाँ पुर्तगालियों का लगभग 450 सालों से शासन था।वर्ष 1961 से पूर्व गोवा भारत का हिस्सा नहीं था।
जब 1947 में भारत को आज़ादी मिल गयी थी तब भी यहाँ पर पुर्तगालियों का ही राज्य स्थापित था। भारत सरकार के बार–बार अनुरोध करने पर भी पुर्तगाली यहाँ से जाने को तैयार नहीं थे।
19 दिसंबर 1961 में विजय नामक सैन्य ऑपरेशनके दौरान गोवा को भारतीय संघ में विलय करा दिया गया । पुर्तगाल के गवर्नर जनरल वसालो इ सिल्वा ने भारतीय सेना प्रमुख पीएन थापर के सामने सरेंडर कर दिया था।
बताया जाता है कि विजय नामक सैन्य ऑपरेशन 36 घंटे से भी ज्यादा समय तक चले और फिर 19 दिसंबर 1961 को भारत ने गोवा को आजाद करा लिया था। फिर बाद में पुर्तगाली सेना ने बिना किसी शर्त के 19 दिसंबर 1961 को भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया और इस तरह गोवा आजाद हो गया। 30 मई 1987 को गोवा को भारतीय राज्य का दर्जा मिला लेकिन ‘गोवा मुक्ति दिवस‘ प्रति वर्ष ’19 दिसम्बर’ को मनाया जाता है।
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