जहां एक तरफ ये त्योहार छुट्टी, पार्टी करने का बहाना, घूमने फिरने और दोस्तों से मिलने का मौका लाता है, वहीं दूसरी तरफ यह त्योहर कुछ बच्चों की लिए कमाई का एक जरिया भी ले कर आता है। इन दिनों आप ऐसे बहुत से बच्चों को कोलकाता के पार्क स्ट्रीट, न्यू मार्केट की तरफ देख सकेंगे जो क्रिसमस की सजावट की वस्तुएं, टोपी, खिलौने बेच रहे हैं, ताकि उन्हें कुछ पैसे कमाने का अवसर मिल सके और उनकी प्रारंभिक ज़रूरतें पूरी हो सके। घर में कुछ दिनों के लिए ही सही लेकिन चूल्हा जल सके।
हमारी संवादाता ने उनमें से ही कुछ बच्चों से बातचीत की।

साल के इस वक्त बिहार से कोलकाता आते है सिर्फ क्रिसमस का ही सामान बेचने
बिहार के रहने वाले, अकरम खान (13) ने बताया कि वे साल के इस वक़्त बिहार से कोलकाता सिर्फ क्रिसमस के लिए आते है। इस वक़्त कोलकाता में बहुत रौनक रहती है, और पार्क स्ट्रीट में घूमने आए लोग बड़ी उत्साह के साथ क्रिसमस के सामानों को खरीदतें है। पूछे जाने पर बच्चे ने बताया कि उसके घर पर माता पिता और 3 चोट भाई बहन है। पिता उसके बिहार में राजमिस्त्री का काम करते हैं। घर की स्थिति बहुत दयनीय है जिसके कारण त्योहार के समय उसे ऐसे ही समान बेचना पड़ता है ताकि वह अपने पिता की कुछ मदद कर सके। यह से उसे जो भी कमाई होगी उससे वह घर जा कर अपनी पढ़ाई में लगाएगा।
इधर सुंदरबन से भी एक बच्ची समान बेचने आई है। बच्ची ने अपना नाम ज्योति शाह (12) बताया है, वह सुंदरबन की रहने वाली है और वही कक्षा 6 में पढ़ती है। उसने बताया कि उसकी माता यह लोगों के घर में झाड़ू-पोछा लगाने का काम करती है क्योंकि उसके पिता कमाते नहीं है। आर्थिक स्थिति सही ना होने के कारण उसे कोलकाता आ कर त्योहार के वक़्त दूकान लगाना पड़ता है। यह दूकान उसके भाई की है, भाई की मदद करने के लिए वो प्रतिवर्ष खासकर क्रिसमस के वक़्त दूकान लगाती है, क्योंकि इस वक़्त सामानों की बिक्री ज़्यादा होती है। बच्ची ने बताया कि क्रिसमस के समय वह प्रतिदिन करीब 300 रुपए कमा लेती है।
पैसों की तंगी के कारण लगाते है दूकान
पार्क स्ट्रीट में ही गुब्बारों का गुच्छा हाथ में पकड़े एक बच्ची, ज़ीनत खातून (6) ने बातचीत के दौरान बताया कि पैसे ना होने के कारण वह यह गुब्बारे बेचती है। बच्ची ने बताया कि “मैं यहां गुब्बारे बेचती हूं, मेरे पापा भी गुब्बारे बेचते है, और मां घरों में झाड़ू बर्तन करतीं हैं और बड़ी बहन च्युइंग गम बेचती है। बच्ची ने बताया कि गुब्बारे बेच कर जितनी भी कमाई होती है उससे घर में माता पिता की मदद हो जाती है। बच्ची कोलकाता के ही एक स्थानीय स्कूल में यू.के.जी में पढ़ती हैं। वह सुबह स्कूल जाती है और स्कूल से आकर गुब्बारे बेचती है। वहीं फुटपाथ पर क्रिसमस का समान बेचती ज़ायरा (10) ने बताया कि उसके पिता नहीं है और उसकी मां दूसरों के घर साफ सफाई का काम करतीं हैं।
त्योहारों पर अच्छी कमाई हो जाती है, जिससे उसके घर में दो पैसे आ जाते है और उसकी मां की थोड़ी मदद हो जाती है। शाहिना ने बताया कि उसकी मां ने उसे दूकान लगाने के लिए कुछ पैसे और समान दिए है, दिन भर में उसकी कमाई कम से कम 200 रुपए तक हो जाती है। वह कोलकाता के ही एक स्थानीय स्कूल में कक्षा 4 में पढ़ती है।
वह सुबह 8 से 12 बजे तक स्कूल में रहती है और फिर 1 बजे से रात 8 बजे तक दूकान लगाती है। वहीं पास ही में फुटपाथ पर क्रिसमस ट्री, चश्में, टोपियां व अन्य सजावट की वस्तुएं बेच रहे एक बच्चे जिसका नाम शारिक है, बताया कि उसके मम्मी पापा दोनों ही टोपियां बेचते है और वो क्रिसमस का समान बेच रहा है ताकि थोड़ा अधिक कमा सके जिससे वो अपने माता पिता की मदद कर सके और घर पर भी कुछ अधिक रूपए आ सके। उसने बताया कि वह पढ़ाई नहीं करता क्योंकि उसके पास स्कूल जाने के पैसे नहीं है। क्रिसमस खत्म होने के बाद वह गुलाब के फूल बेचता है।
इन बच्चों के अलावा और भी कई ऐसे बच्चे है जो कि त्याहारों पर दूकान लगाकर अपने माता पिता की आर्थिक सहायता करते हैं।
कोलकाता का क्रिसमस:
ब्रिटिश राज की राजधानी के रूप में अपना इतिहास बनाने के बाद, कोलकाता एक महत्वूर्ण बंगाली ईसाई आबादी का घर बन गया, 2011 में कोलकाता में लगभग 40,000 ईसाई रहते थे। यह छुट्टी धार्मिक और पारिवारिक रूप से उत्पन्न हुई। लेकिन कोलकाता में क्रिसमस सिर्फ ईसाई समुदाय का त्योहार बन कर नहीं रहा। 2010 में, पश्चिम बंगाल राज्य के मुख्यमंत्री, ममता बनर्जी ने अधिक पर्यटन को आकर्षित करने की उम्मीद में क्रिसमस समारोह को एक पायदान ऊपर लाने का और उसे बढ़ावा देने का फैसला किया।
कोलकाता में हर उत्सव का अपना एक अलग रंग एक अलग ढंग होता है, यह अपनी अलग पहचान लेकर आता है और उतनी ही उत्साह से मनाया भी जाता है। वजह यह है कि कोलकाता में कोई भी त्योहार मज़हब में बंटा नहीं होता। बल्कि हर इंसान उस जश्न को अपनों के साथ मनाता है। शायद यही कारण है कि लोग इसे “सिटी ऑफ जॉय” भी कहते है। चाहे कितने भी अलग क्यों ना हो यह के लोग, त्योहार सबको साथ में ले ही आती है।
ठंड की छुट्टियां यानी कि शहर में क्रिसमस की तैयारी का समय। कोलकाता में क्रिसमस की तैयारियां शुरू हो गई है जो की क्रिसमस और नए साल तक चलने वाली हैं। पार्क स्ट्रीट को लाइटों से सजा दिया गया है। कोलकाता स्थित सारे चर्चों को भी अच्छे से सजाया गया है। बाज़ार में क्रिसमस की पार्टी के लिए लाइट वाले हेयर बैंड, सैंटा क्लॉज वाली टोपियां, रंग बिरंगे गुब्बारे, चश्में, क्रिसमस ट्री, और अन्य सजावट की चीज़ें बिक रही है।
राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को मिली कैबिनेट की मंजूरी
from देश – Navyug Sandesh https://ift.tt/3984AoH
No comments:
Post a Comment