Thursday, August 16, 2018

अटल बिहारी वाजपेयी की जिंदगी के ऐसे पहलू, जो आपने पहले कभी नहीं सुने होंगे

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (93)के निधन से देश में शौक की लहर दौड़ गई है। पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी सिर्फ राजनीतिज्ञ नहीं थे, बल्कि वह एक प्रख्यात हिंदी कवि भी थे। अपनी हिंदी भाषण शैली के कारण पूरे देश के साथ दुनिया में भी मशहूर थे। संयुक्त राष्ट्र में उन्होंने हिंदी में भाषण देकर पूरी दुनिया में इतिहास रच दिया था। वह अपनी मिलनसार छवि और प्रेम भाव के कारण दूसरे दलों के भी चहेते थे। वह अपनी कुशल शैली और मधुर बोली से सबको अपना बना लेते थे। वाजपेयी का जन्म उनका जन्म ग्वालियर में 25 दिसंबर 1924 को हुआ था।

तीन बार रहे प्रधानमंत्री


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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे। पहला कार्यकाल उनका 16 मई से 1 जून 1996 तक रहा। उनकी पहली सरकार 13 दिन में ही गिर गई थी।

उनका प्रधानमंत्री के रूप में दूसरा कार्यकाल 1998 से 1999 तक रहा, उनकी दूसरी सरकार का कार्यकाल 13 माह रहा।

जबकि अटल बिहारी वाजपेयी तीसरे कार्यकाल में पांच साल पूरे करने वाले पहले गैर कांग्रेस प्रधानमंत्री रहे। उनका तीसरा कार्यकाल 1999 से 2004 तक रहा।

एनडीए के पहले प्रधानमंत्री थे।

वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग, एनडीए) सरकार के पहले प्रधानमन्त्री थे जिन्होंने गैर कांग्रेसी प्रधानमन्त्री तौर पर 5 साल का कार्यकाल पूरा किया। अटल बिहारी ने एनडीए के 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी।

परिवार और पृष्ठभूमि

अटल बिहारी वाजपेयी का पिता नाम पण्डित कृष्ण बिहारी वाजपेयी था, जबकि माता नाम कृष्णा वाजपेयी था। उनके पिता ग्वालियर रियासत में अध्यापक थे। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश में आगरा जनपद के बटेश्वर के मूल निवासी थे।

शिक्षा

वाजपेयी ने बीए की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज (वर्तमान में लक्ष्मीबाई कालेज) से प्राप्त की थी। वह छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़़ गए थे। इसके बाद उन्होंने कानपुर के डीएवी कालेज से राजनीति शास्त्र में एमए की परीक्षा उत्तीर्ण की। उसके बाद उन्होंने कानपुर में ही एलएलबी की पढ़ाई भी शुरू की, लेकिन, इसके बाद वह पढ़ाई छोडक़र संघ से जुड़ गए।

पत्रकार की भूमिका में भी रहे

अटल बिहारी वाजपेयी ने आरएसएस की मुखमत्र पाञ्चजन्य का सम्पाद कार्य भी देखा। इसके अलावा वाजपेयी ने राष्ट्रधर्म, दैनिक स्वदेश और वीर अर्जुन जैसे समाचार पत्रों को सम्पादन भी किया।
राजनीतिक जीवन

सन् 1955 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, परन्तु सफलता नहीं मिली। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सन् 1957 में बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुंचे। सन् 1957 से 1977 तक जनता पार्टी की स्थापना तक वे बीस वर्ष तक लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे। मोरारजी देसाई की सरकार में सन् 1977 से 1979 तक विदेश मन्त्री रहे और विदेशों में भारत की छवि बनायी।

राजनीतिक जीवन

वाजपेयी भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में एक थे। सन् 1968 से 1973 तक वह जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके थे। सन् 1955 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, परन्तु सफलता नहीं मिली। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सन् 1957 में बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुंचे। सन् 1957 से 1977 तक जनता पार्टी की स्थापना तक वे बीस वर्ष तक लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे। मोरारजी देसाई की सरकार में सन् 1977 से 1979 तक विदेश मन्त्री रहे।

बीजेप के संस्थापक और प्रधानमंत्री बने

1980 में जनता पार्टी से असन्तुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी, इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का उदय हुआ। पूर्व उपप्रधानमंत्री और उनके सबसे करीबी लालकृष्ण आडवाणी के साथ मिलकर बीजेपी की स्थापना (1980) में भी अटल बिहारी वाजपेयी ने अहम भूमिका निभाई।
अटल भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद पर भी दो बार चुने गए। इसके बाद उनकी जिंदगी का यादगार लम्हा और भारतीय राजीति का ऐतिहासिक युग शुुरु हुआ जब अटल बिहारी 16 मई 1996 को देश के प्रधानमंत्री बने, लेकिन, यह सरकार ज्यादा नहीं चल पाई और उन्हें 13 दिन बाद ही प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

दुनिया में भारत का लोहा मनवाया

प्रधानमंत्री रहते अटल बिहारी वाजपेयी ने ऐसा काम किया जिससे पूरी दुनिया में भारत की ताकत का डंका बज गया। अटल बिहारी वाजपेयी ने पोखरण में परमाणु बम (11 और 13 मई 1998) का परीक्षण किया। इस परीक्षण के चलते दुनिया के कई देश भारत के खिलाफ खड़े हो गए थे। अमेरिका समेत जी5 देशों ने तो भारत पर कई प्रतिबंध लगाए और आगे परमाणु परीक्षण नहीं करने का दबाव बनाया। लेकिन, युग पुरुष अटल बिहारी किसी के आगे नहीं झुके ओर परमाणु के सभी परीक्षण पूरे कर दुनिया में भारत को परमाणुण समन्न शक्ति बना दिया।

दिया अमन का संदेश

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने हमेशा पड़ौसी देशों से अच्छे रिश्ते बनाए रखने की कोशिश की। उन्होंने अमन की पहल करते हुए 19 फऱवरी 1999 को सदा-ए-सरहद नाम से दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा शुरू की गई। इस सेवा का उद्घाटन करते हुए प्रथम यात्री के रूप में वाजपेयी ने पाकिस्तान की यात्रा करके नवाज़ शरीफ से मुलाकात की और आपसी संबंधों में एक नयी शुरुआत की।

पाकिस्तन को धूल चटाई

अटल बिहारी वाजपेयी की अमन की कोशिशों की पहल को उस वक्त गहरा धक्का लगा जब पाकिस्तानी सेना की मदद से घुसपैठियों ने जम्मू कश्मीर के कारगिल में घुसपैठ की। पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ की शह पर पाकिस्तानी सेना व उग्रवादियों ने कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ करके कई पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लिया था।

अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तानी सेना को घुसपैठियों को रोकने के लिए चेताया। लेकिन, जब पाकिस्तानी सेना ने उल्टे भारत को आंख दिखाई तो वाजपेयी ने सेना को ऑपरेशन की छूट दे दी। बॉर्डर पर भारतीय सेना ने घुसपैठियों और पाकिस्तान सेना के दांत खट्टे कर दिए। भारत की सेना के आगे आखिरकार पाकिस्तान सेना को पीछे हटना पड़ा। पाकिस्तान सेना को पस्त होता देख, पाकिस्तान के घुसपैठिये भी लौटने को मजबूर हो गए। इस जंग में कई सैनिक शहीद हुए थे।
पाकिस्तान ने कर दिया था लाश लेने से इंकार

दुश्मन के लिए भी मानवता की मिसाल थे

जंग के दौरान मारे गए पाकिस्तानी घुसपैठियों और सैनिकों की लाश को भी भारतीय सेना ने सम्मानपूर्वक रखा। जब अटल सरकार ने पाकिस्तान से उनके आदमियों की लाशें ले जाने को कहा तो पाकिस्तान ने लाशें लेने से इंकार कर दिया। भारत सरकार के आदेश पर इनका अंतिम संस्कार सम्मानपूर्वक और उन्हीं की धार्मिक रितियों के अनुसार किया गया।

राजनीति से बनाई दूरी

2004 में एनडीए की सरकार जाने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति से दूर होते चले गए। पिछले 8 साल से तो वाजपेयी की तबियत सहीं नहीं रहती थी। वह घर में ही रहते थे। उनके देखने, सोचने, समझने की शक्ति पूरी तरह क्षीण हो चुकी थी। वह सार्वजानिक जीवन से पूरी तरह दूर हो चुके थे।

लंबे समय से बीमार थे

लंबे समय से बीमार चल रहे वाजपेयी को सांस लेने में परेशानी, यूरीन व किडनी में संक्रमण होने के कारण 11 जून को एम्स में भर्ती किया गया था। 15 अगस्त को उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया। अंत में जीवन से लड़ते हुए 16 अगस्त को युगपुरुष अटल बिहारी वाजपेयी हमें छोडक़र एक आत्मा के रूप में अमर हो गए।

विजय घाट पर होगा अंतिम संस्कार

वाजपेयी का अंतिम संस्कार विजय घाट पर किया जाएगा। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने इसके लिए डेढ़ एकड़ जमीन मुहैया कराई है।

शत शत नमन

नवयुग संदेश परिवार दुख प्रकट करते हुए अटल बिहारी वाजपेयी जी की महान आत्मा को शत शत नमन करता है, साथ ही प्रार्थना करता है कि भगवान वाजपेयी जी के परिवार ओर समर्थकों को इस दुख की घड़ी में हिम्मत और संबल दे।

महान और पवित्र आत्मा को नवयुग संदेश परिवार शत शत नमर करता है!

भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो।

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