Saturday, September 1, 2018

जैन मुनि तरुण सागर जी का 51 वर्ष की उम्र में निधन

जैन मुनि तरुण सागर जी का 51 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। मुनिश्री अपने अनुयायियों के साथ दिल्ली के कृष्णा नगर स्थित राधापुरी जैन मंदिर चातुर्मास स्थल पर थे। जानकारी के मुताबिक मुनिश्री अपने गुरु पुष्पदंत सागर महाराजजी की स्वीकृति के बाद संलेखना (आहार-जल न लेना) कर रहे थे।


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खबरों के मुताबिक उन्हें 20 दिन पहले पीलिया हुआ था, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। लेकिन, इलाज में कोई खास फर्क ना होता देख उन्होंने आगे का इलाज करवाने के लिए मना कर दिया था।। मुनि तरुण सागर जी अपने खरे और कड़वे प्रवचनों के लिए प्रसिद्ध थे । इस कारण से उन्हें क्रांतिकारी संत भी कहा जाता है।

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वहीं, कड़वे प्रवचन नामक उनकी पुस्तक काफी प्रचलित है। तरुण सागर जी को मध्यप्रदेश सरकार ने 6 फरवरी 2002 को राजकीय अतिथि का दर्जा दिया था। तरुण सागर जी महाराज का मूल नाम पवन कुमार जैन है।

उनका जन्म दमोह (मध्यप्रदेश) के गांव गुहजी में 26 जून, 1967 को हुआ। मुनिश्री ने 8 मार्च 1981 को घर छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ में दीक्षा ली। जैन धर्म के अनुसार मृत्यु को पास देखकर धीरे-धीरे खानपान त्याग देने को संथारा या संलेखना (मृत्यु तक उपवास) कहा जाता है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर तरुण सागर जी महाराज के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा, ‘मुनि तरुण सागर जी महाराज के असमय निधन से गहरा दुख हुआ है। उनके ऊंचे आदर्शों और समाज के प्रति योगदान के लिए हम उन्हें हमेशा याद रखेंगे। उनके विचार लोगों को प्रेरणा देते रहेंगे। जैन समुदाय और उनके असंख्य अनुयायियों के प्रति मेरी संवेदना है।

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