
इस बार भगवान विष्णु क्षीरसागर से चार महीने के उपरान्त कल यानि 19 नवंबर को जागेंगे. यानि कि कल पूरे भारतवर्ष में देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी. यह एकादशी कार्तिक माह के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है. विष्णु जी के शयन काल के चार महीनों में विवाह अादि मांगलिक कार्यों का आयोजन करना वर्जित है. भगवान के जागने के बाद ही इस एकादशी से सभी शुभ तथा मांगलिक कार्य शुरू किए जाते हैं. इस साल देवोत्थान एकादशी 19 नवंबर को है.
देवउठनी एकादशी पर न करें ये काम

1. शास्त्रों में देवउठनी एकादशी पर मांस, प्याज, लहसुन और मसूर की दाल का सेवन नहीं करना चाहिए. पूरी तरह ब्रह्म्चर्य का पालन करना चाहिए.
2. एकादशी के दिन सुबह दातुन या मंजन नहीं करना चाहिए. उंगली से दांतों को साफ करना चाहिए. इस दिन किसी पेड़-पत्ती की फूल-पत्ती तोड़ना वर्जित है.
3. नित्यक्रिया और स्नान के बाद गीता का पाठ करना चाहिए. एकादशी की कथा पढ़नी चाहिए.
4. एकादशी के दिन चावल नहीं खाना चाहिए, इसे खाने से व्यक्ति का मन चंचल होता है और प्रभु भक्ति में मन नहीं लगता है.
5. एकादशी के दिन झूठ नहीं बोलें, इससे पाप लगता है. झूठ बोलने से मन दूषित हो जाता है और दूषित भक्ति से पूजा नहीं की जाती है. एकादशी के दिन भूलकर भी क्रोध नहीं करें.
6. एकादशी को बिस्तर पर नहीं, जमीन पर सोना चाहिए.
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