Tuesday, July 16, 2019

ऐसे आया साबूदाना भारत में

साबूदाना बहुत लाभकारी पोषक आहार है। यह व्यंजनों में काम आने वाला बारिक व छोटा सफेद मोती की जैसे दिखता है। साबूदाना सैगो पाम नामक पेड़ के तने के गूदे से बनता है।  ये मूलरूप से पूर्वी अफ्रीका का पौधा है। उबलने के बाद यह चिपचिपा, गुदगुदा और लहसदार हो जाता है। भारत में साबूदाने का उपयोग अधिकतर पापड़, खीर और खिचड़ी बनाने में होता है। व्रत में इसे ज्यादा खाया जाता है |हर जगह यह इस्तेमाल ज्यादा होता है, सूप और अन्य चीज़ों को गाढ़ा करने के लिए भी इसका उपयोग होता है

 तमिलनाडू में सबसे पहले हुआ उत्पादन:-

साबूदाने का उत्पादन सबसे पहले भारत में तमिलनाडु के सेलम में हुआ था।
लगभग 1943-44  में भारत में इसका उत्पादन एक छोटे रूप में हुआ । इसमें
पहले टैपियाका की जड़ों को मसल कर उसके दूध को छानकर उसे जमने देते थे।
फिर उसकी छोटी छोटी गोलियां बनाकर सेंक लेते थे। लो हो गया साबूदाना तैयार

क्या है टैपियाका:-

टैपियाका एक जड़ का नाम है | साबुदाना के उत्पादन के लिए इसी जड़ का इस्तेमाल किया जाता है। जिसे हम टैपियाका कहते हैं। साबूदाना में कार्बोहाइड्रेट की प्रमुखता होती है और इसमें कुछ मात्रा में कैल्शियम व विटामिन सी भी होता है। शिशुओं और बीमार व्यक्तियों के
लिए या उपवास के दौरान, साबुदाने का उपयोग बहुत लाभकारी माना जाता है।

व्यंजनों में प्रयोग

खिचडी, वड़ा, बोंडा (आलू, सींगदाना, सेंधा-नमक, काली मिर्च या हरी मिर्च के साथ मिश्रित) आदि के रूप में व्यंजनों की एक किस्म में प्रयोग किया जाता है। साबूदाना को दूध में पकाकर खीर भी बनाई जाती है। यह खीर शरीर की हड्डियो में कैल्श्यिम बनाकर हड्डियों को मजबूत करती है।



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