Thursday, January 2, 2020

बगांल जीतने के लिए अमित शाह सीख रहे है बांग्ला

बीजेपी औऱ ममता बनर्जी अक्सर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते रहते है। ममता बनर्जी अपने भाषणों में केन्द्र की भाजपा सरकार की अलोचना करती रहती है। नागरिकता कानून औऱ एनआरसी लेकर देश में काफी ज्यादा हिंसा हुई थी। पश्चिम बगांल में भी इस कानून का लगातार वहां के लोगों ने विरोध किया। ममता बनर्जी ने दावा किया है कि वह सीएए और एनआरसी को प्रदेश में लागू नही होने देगी। उसके बाद गैर भाजपा प्रशासित राज्यों ने सीएए और एनआरसी को राज्य में लागू नही करने की बात कही।

पश्चिम बगांल में एक साल बाद चुनाव होना है। भाजपा उसकी त्यारी में जुट चुकी है। देश के गृह मंत्री ने बगांल जीतने के लिए बांग्ला सीखनी शुरु कर दी है। ताकि वह अपने भाषणों में बांग्ला का प्रयोग कर स्थानीय लोगों तक उनकी ही भाषा में अपनी बात पहुचां सके। ममता बनर्जी हमेंशा अपने भाषणों में बाग्ला भाषा का प्रयोग करती है। अमित शाह ने भी ममता बनर्जी के लोकप्रिय शब्द मां, माटी और मानुष  को काटने के लिए नई रणनिति बनाई है। अमित शाह ने अपने घर एक अध्यापक को रखा है जो उन्हें अच्छी तरीके से बाग्ला भाषा सिखा सके।

अमित शाह बाग्ला इसलिए सीख रहे है ताकि वो ममता को उनके भाषणों में काउंटर कर सके। और प्रदेश के लोगों तक अपनी बात पहुचां सके। ताकि प्रदेश के लोग उनसे जुड़ सके। इसके लिए अमित शाह ने अपने घर पर एक गुरु को रखा है। हरियाणा, महाराष्ट्र और  झारखड़ में पार्टी ने काफी निराशजनक प्रदर्शन किेया। राजनिति का चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह बगांल जीतने के लिए नई राजनिति तैयार कर रहे है। बगांल में कुल 295 विधानसभा सीट है पार्टी ने बगांल जीतेने के लिए 250 का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा गृह मंत्री तमिल,तेलगू औऱ अन्य प्रदेशों की स्थानीय भाषा सीख रहे है। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बगांल में 18 सीटें जीती तो वही तृणमूल कांग्रेस ने 22 सीटें जीती थी। कुल 42 सीटें थी।



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