Monday, February 3, 2020

नॉर्थ-ईस्ट का स्वर्ग कहा जाता है तवांग को, जानिए इससे जुड़ी खास बातें

अरुणाचल प्रदेश का तवांग जिला भारत के खूबसूरत पर्यटक स्थल में से एक है। इस छोटे से पहाड़ी जिले को प्रकृति ने इतनी खूबसूरती से बनाया है कि यहां जाने के बाद वहां से आने का मन ही नहीं होगा। सर्दियों में बर्फबारी से बाद यह बर्फ से ढक जाता है, तब इसकी सुंदरता देखते ही बनती है। यहां की खूबसूरती के कारण ही तवांग को नॉर्थ-ईस्ट का स्वर्ग कहा जाता है।


तवांग जिले में स्थित तवांग मठ भारत का सबसे बड़ा और एशिया का दूसरा सबसे बड़ा मठ है, जो समुद्र तल से 10 हजार फीट की ऊंचाई पर एक पहाड़ पर स्थित है। यह मठ तवांग नदी की घाटी में स्थित है। तवांग जिले के बोमडिला से इस मठ की दूरी 180 किमी है। इस मठ को तिब्बती भाषा में गालडेन नमग्याल लहात्से के नाम से भी जाना जाता है, जिसका मतलब है तारों भरी रात का आकाशीय स्वर्ग। तवांग मठ विश्व प्रसिद्ध मठ है, जो कि तिब्बती बौद्धों के लिए पवित्र स्थान है।

तवांग मठ अपने आप में ऐतिहासिक महत्व रखता है। माना जाता है कि इसकी स्थापना सन् 1681 में 5वें दलाई लामा न्गावांग लोबसांग ग्यात्सो की इच्छा के अनुरूप की गई थी। तवांग का शाब्दिक अर्थ घोड़े द्वारा चुना जाना है। कहा जाता है कि इस मठ के लिए इस स्थान को एक घोड़े के द्वारा चुना गया था। उस घोड़े के स्वामी और इस मठ के संस्थापक, मेराक लामा लोड्रे ग्यात्सो थे। छठे दलाई लामा त्सांग्यांग ग्यात्सो का जन्म तवांग में हुआ था।

तवांग मठ में उत्तर की ओर से काकालिंग गेट के रास्ते प्रवेश किया जा सकता है। यह एक झोपड़ीनुमा संरचना है इसकी दीवारें पत्थर से बनी हैं और छत पर मंडल या काईंग-खोर चित्रित हैं।

अंदर की दीवारों पर संतों और देवताओं के अनेक चित्र चित्रित हैं। इसके बाद मठ का मुख्य द्वार है, जो इसके उत्तरी दिशा में है। इसकी पूर्वी दीवार काफी लंबी है। इस मठ का एक और प्रमुख आकर्षण भगवान बुद्ध की सोने की 25 फुट ऊंची प्रतिमा है।

इस प्रतिमा में भगवान बौद्घ एक कमल रूपी सिंहासन पर बैठे हैं। उनके अगल-बगल में उनके दो मुख्य सेवक हैं, और दोनो के हाथों में एक डंडा और एक भिक्षा पात्र है। तीन मंजिला तवांग मठ काफी लंबी परिसर की दीवार से घिरा है और इसमें 65 आवासीय भवन हैं। यहां एक पुस्तकालय भी है, जिसमें प्रचीन पुस्तक और पांडुलिपियों का बेहतरीन संकलन है। ऐसा माना जाता है कि ये पांडुलिपि 17वीं शताब्दी की है।

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