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Wednesday, August 12, 2020

छिलकों में सेब के मुकाबले पाए जाते है ज्यादा मात्रा में पोषक तत्व

कई फलों और सब्जियों को छिलके समेत खाना ही बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है। उन्हीं में से एक फल सेब भी है। सेब में फ्लेवनॉएड्स जैसे ऐंटि ऑक्सिडेंट्स, पोटैशियम और फाइबर भरपूर मात्रा में मौजूद होता है लेकिन इसके छिलकों में सेब के मुकाबले कहीं ज्यादा मात्रा में ये सब पाए जाते है|

इसलिए आप यह जान लें कि सेब का छिलका भी काफी फायदेमंद होता है। सेब को छिलके समेत खाने से आप दैनिक मिनरल्स की जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकते हैं। इलिनोइस यूनिवर्सिटी के अनुसार, सेब के छिलके में कैल्शियम, पोटैशियम, फास्फोरस, फोलेट और आयरन जैसे महत्वपूर्ण मिनरल्स मौजूद होते हैं।

आपका शरीर इन कैल्शियम और फास्फोरस जैसे मिनरल का प्रयोग हड्डियों और दांतों को बहुत ही मजबूत बनाने में करता है।

सेब के छिलके में हाई बीपी से मुकाबला करने के लिए जरूरी रसायनिक तत्वों की छह गुना मात्रा तक पायी जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि रोजाना एक सेब छिलका समेत खाते रहने से हाई बीपी में बहुत आराम मिलता है।

लंबे समय से सेब के छिलके को एंटीऑक्सिडेंट और फ्लेवानोइड्स का प्राकृतिक स्रोत भी माना जाता रहा है। जो दिल के लिए बहुत अच्छा माना जाता हैं। कनाडा के नोवा स्कोटिया के शोध अनुसार, सेब का छिलका उतारने का मतलब दिल को होने वाले फायदे से विल्कुल वंचित करना है।

छिलका सहित सेब खाना स्वास्थ्य के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होता है। इसमें खनिज, विटमिन और रेशा प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो कमजोरी में भी काफी फायदेमंद होता है। साथ ही सेब के छिलके में पैक्टिन नामक रसायन भी पाया जाता है जो कोलेस्ट्राल और रक्त शर्करा का स्तर बहुत ही कम रखता है।

अग्रीकल्चर ऐंड ऐग्रो फूड संस्थान कनाडा के वैज्ञानिकों के अनुसार, छिलके में भीतरी हिस्से की अपेक्षाकृत ऐंटी-आक्सिडेंट्स की मात्रा कहीं ज्यादा मौजूद होती है, इसलिए सेब खाते समय उसका छिलका उतारकर नहीं बल्कि छिलके सहित खाना बहुत ज्यादा फायदेमंद है। वैज्ञानिकों के अनुसार, सेब के लाल छिलके में ‘ऐंटी-ऑक्सिडेंटस’ की मात्रा काफी ज्यादा होती है। एंटी-ऑक्सिडेंट्स ऐसे रसायन हैं,

जो स्वास्थ्य को अच्छा एवं रोगमुक्त बनाने में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। सेब के छिलकों में विटमिन ए भरपूर मात्रा में होता है। सेब को हमें छिलकों समेत ही खाना चाहिए क्योंकि शरीर विटमिन ए का इस्तेमाल मजबूत नजर, आंखों के विकास और महत्वपूर्ण प्रकियाओं जैसे कोशिका विभाजन के रूप में काम करता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस के अनुसार, सेब के छिलके में विटमिन सी भरपूर मात्रा में होता है। आपका शरीर विटमिन सी का इस्तेमाल घावों को भरने और मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली के निर्माण के लिए करता रहता है।



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दांपत्य जीवन को सुखद और बेहतर बनाता है ये फल

लोग स्टेमिना बढ़ाने के लिए कई दवाइयों का प्रयोग करते हैं। लेकिन, अब आप दवाओं को छोडक़र जूस से भी इस चीज को बढ़ा सकते हैं। अब आपको दवाई खाने की जरूरत नहीं। जी हां, आज हम आपको कुछ ऐसे फलों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके सेवन से आपको वायग्रा जैसी दवाईयों की कभी जरूरत नहीं पड़ेगी।

दरअसल, वियाग्रा जैसी दवाईयों को बनाने के लिए जिन तत्वों का इस्तेमाल होता है वे इन्हीं फलों से लिए जाते हैं। ऐसे में क्यों ना सीधे उन फलों का खाया जाए जो कामेच्छा को बढ़ाते हैं। जानिए वो कौन से फल हैं जो आपके दांपत्य जीवन को बेहतर बनाएंगे।

  • तरबूज

तरबूज में कई तरह के पोषक तत्व मौजूद होते हैं लेकिन कई शोधों में साबित हुआ है कि तरबूज में कामेच्छा बढ़ाने की शक्ति होती है।

  • लहसुन

लहसुन भी यौनेच्छा इच्छा को बढ़ाता है। लहसुस में पाया जाने वाला नाइट्रिक ऑक्साइड एंजाइम सेक्सुअल पर्फामेंस के बढ़ता है।

  • नींबू

नींबू के रस में पाए जाने वाले तत्व कामेच्छा बढ़ाते हैं।

  • कद्दू

कद्दू के बीजों को सुखाकर इस्तेमाल करने से सेक्स लाइफ अच्छी होती है।

  • जिनसंग

शोध बताते हैं कि जो महिलाएं महीने में एक बार जिनसंग लेती है उनकी कामेच्छा में बढ़ोत्तरी देखी गई है जिससे उनकी सेक्स लाइफ बेहतर हुई। जिनसंग को पेरू राष्ट्र की वियाग्रा भी कहते हैं।

  • अदरक

पुराने समय में ही अदरक को प्रयोग कई तरह की औषधियों का प्रयोग होता था। इसको कच्चा प्रयोग करने से यौनेच्छा में बढ़ोत्तरी होती है।



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जानें, सरसों के तेल के फायदे

सेहत के लिए सरसों का तेल फायदेमंद होता है। वैसे तो सभी घरों में सरसों का तेल मिल जाएगा, लेकिन इसके फायदे बहुत कम लोग जानते है। सरसों का तेल खाने के स्वाद को बढ़ाता है। सरसों का तेल कई बीमारियों को दूर करने में सहायक होता है। यह हमारे स्वास्थ्य, स्किन और बालों के लिए बहुत लाभदायक है। इसे कई ऐसे फायदे है, जिनसे आप अनजान होंगे। चलिए आइए जानें सरसों के तेल के फायदे।

– कान का दर्द होगा दूर : कान मेें दर्द होने पर सरसों का तेल का इस्तेमाल कीजिए। इससे आपको राहत मिलेगी। इसके अलावा सरसों के तेल में लहसुन डाल कर गर्म करके कान में डाले।

-करें दांत साफ : सरसों के तेल में नमक मिलाकर दांत साफ कीजिए। इससे दांत दर्द, पायरिया आदि रोगों से आराम मिलता है।

-भूख बढ़ाएगा : अगर आपको भूख कम लगती है तो खाने में सरसों का तेल इस्तेमाल करें। यह हमारे पेट में एपिटाइजर का काम करता है और भूख बढ़ाता है।

-कैंसर की नहीं बनने देगा गांठ : सरसों के तेल में मौजूद ग्लुकोजिलोलेट शरीर में कैंसर और ट्यूमर की गांठ बनने से रोकता है।

-गठिया के दर्द में मिलेगा आराम : सरसों के तेल में कपूर डालकर मालिश करने से गठिया के दर्द से आराम मिलता है।

-चमकेगा चेहरा : बेसन,हल्दी, पीसा हुआ कपूर और सरसों का तेल डालकर चेहरे पर लगाएं। इससे चेहरे का रंग साफ होता है और त्वचा में चमक आती है।

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जूस से दवा लेना मरीज के लिए हो सकता है खतरनाक

अक्सर हम बीमार होने पर चाय, दूध अथवा पानी से दवा लेते हैं, इन केस में ऐसा भी होता है कि कई लोग जूस से भी दवा लेते हैं, लेकिन एक चौंकाने वाली एडवाइजरी में यह बात सामने आई है कि इस जूस से दवा लेना मरीज के लिए काफी घातक साबित हो सकता है।

इंडियन मेडिकल असोसिएशन (आईएमए) की हालिया अडवाइजरी के मुताबिक, ऐसा करने से दवा का असर कम हो जाता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव व एचसीएफआई के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के. के. अग्रवाल के मुताबिक, अंगूर, संतरे और सेब का रस शरीर में दवाओं को सोखने की क्षमता को कम कर उनके शरीर पर पडऩे वाले असर को भी कम करता है।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियंस के डॉक्टरों ने कोलेस्ट्रोल, उच्च रक्तचाप और दिल की धडक़न की दवा लेने वाले मरीजों को, अंगूरों का रस न पीने की चेतावनी दी है। शोध में पता चला है कि अंगूर, संतरे व सेब का रस, कैंसर की दवा एटोपोफोस, बीटा ब्लॉकर दवा एटेनोलोल और एंटी ट्रांसप्लांट रिजेक्शन ड्रग सिस्लोस्पोरीन, सिप्रोफ्लॉक्सासिन, लिवोफ्लॉक्सासिन व इट्राकॉनाजोल जैसे एंटीबायोटिक्स का असर कम करता है।

डॉक्टरों द्वारा किए गए अध्ययन में शामिल वॉलेन्टियर्स ने एलर्जी की दवा, फेक्सोफेनाडाईन सादे पानी व अंगूर के रस के साथ ली। जिन लोगों ने दवाई अंगूर के रस के साथ ली थी, उनके शरीर में केवल आधी दवाई ने ही असर किया। रस में मौजूद तत्व दवा के सोखने की क्षमता को प्रभावित करते हैं।

कुछ रसायन दवा को ले जाने वाले तत्वों को बाधित कर देते हैं, जिससे दवा के सोखने की क्षमता कम हो जाती है। जबकि कुछ रसायन ड्रग्स मेटाबॉलिज्म एंजाइम, जो आम तौर पर दवा को तोडऩे का काम करते हैं, उन्हें बाधित कर देते हैं।

डॉक्टर्स का कहना है कि अगर मरीज दवाई पानी के साथ ले रहा है, तो यह काफी सुरक्षित है। इसके अलावा ध्यान रखें कि हमेशा दवाई एक घूंट पानी की जगह एक ग्लास पानी से लें, क्योंकि ऐसा करने से पानी, पेट में दवा को घुलने में मदद करता है। ठंडे पानी की बजाए गर्म पानी से दवाई लेना और भी बेहतर विकल्प है।



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खांसी को दूर करने के सबसे बेस्ट घरेलू नुस्खे

खांसी की समस्या बेहद आम है। अगर आप भी खांसी से परेशान हैं तो आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहे हैं जो आपकी खांसी को पल भर में ठीक कर देंगे-

  • बार-बार खांसी आ रही हो तो आप अदरक-शहद वाली टाॅफी को मुंह में रखें। इससे आपको काफी लाभ होगा।
  • कभी-कभी इंफेक्शन के कारण भी खांसी की समस्या हो जाती है। ऐसे में हल्दी वाला दूध आपके लिए काफी लाभकारी होगा।
  • लौंग को भूनकर उसका सेवन तुलसी के पत्तों के साथ भी कर सकते हैं। आराम आएगा।


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ब्रेन ट्यूमर के कारण भी आ सकती है ज्यादा उबासी

सामान्यतः हम मानते हैं कि उबासी या जम्हाई लेना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। यह हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है, हम दिन में कम से कम एक बार उबासी या जम्हाई जरूर लेते हैं। लोग यह मानते हैं की उबासी शरीर में थकान महसूस होने के कारण आती है, थोड़ी देर सोकर इसे पूर्ण्तः दूर किया जा सकता है।

आपको यह जानकर बहुत आश्चर्य होगा कि कभी-कभार उबासी लेना बहुत ही सामान्य है लेकिन ज्यादा उबासी लेना खतरे की घंटी है।

उबासी बहुत ही सामान्य बात है लेकिन अत्यधिक उबासी कुछ चिकित्सीय स्थितियों की ओर इशारा करती है। कुछ सामान्य चिकित्सीय स्थितियां हैं जो कि ज्यादा उबासी का कारण बनती है:

  • लिवर डिसीज

लिवर संबंधित बीमारी का आखिरी स्टेज अत्यधिक उबासी के रूप में हो सकता है। इस समय महूसस होने वाली थकावट इसके लिए पूर्ण्तः जिम्मेदार है।

  • मल्टीपल स्केलेरोसिस

एक स्टडी के मुताबिक जो लोग इस स्थिति से पीड़ित हैं, उन्हें अत्यधिक उबासी आती है। इससे पीड़ित लोगों में थर्मोरगुलेटरी डिसफंक्शन होता है जहां वे अपने शरीर के तापमान को पूर्ण्तः नियंत्रित करने में असमर्थ होते हैं। उबासी के कारण शरीर का तापमान ठंडा हो जाता है।

  • वासोवगल रिएक्शन

यह तब होता है जब नर्वस सिस्टम का हिस्सा जो कि ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट के लिए पूर्ण्तः जिम्मेदार है, गड़बड़ाता है। यह तब होता है जब आप अत्यधिक तनावपूर्ण स्थिति में होते हैं। ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट में गिरावट ब्लड को मस्तिष्क तक पहुंचने से रोकती है। ऐसी स्थिति में, शरीर स्वचालित रूप से उबासी लेकर ऑक्सीजन लेने की कोशिश करता है।

  • स्लीपिंग डिसऑर्डर

अनिद्रा या स्लीप एपेना सबसे आम स्लीप डिसऑर्डर्स हैं जो कि बहुत अधिक थकावट लाते हैं और इससे उबासी की परेशानी बढ़ जाती है।

  • ब्रेन डिसफंक्शन

स्टीडी के मुताबिक ब्रेन ट्यूमर के कारण अत्यधिक उबासी आती है और ब्रेन स्टेम में घावों से जोड़ा जा सकता है। पिट्यूटरी ग्लैंड के संपीडन का परिणाम भी उबासी के रूप में हो सकता है।



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वजन बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है आपकी अनिद्रा

आजकल की व्यस्त लाइफ के चलते लोगों के पास अपनी सेहत का ख्याल रखने तक का टाइम उपलब्ध नहीं है। शायद यहीं कारण है कि आजकल ज्यादातर लोग किसी न किसी रोग या बीमारी से बुरी तरह ग्रस्त रहते है। इन्हीं बीमारियों में मोटापे की समस्या आम है। हर 5 में से 3 व्यक्ति मोटापे का शिकार हो जाते है।

पहले समय में भारी वजन का सामना केवल बड़ी उम्र के लोगों को करना पड़ता था लेकिन आज के समय में यह समस्या बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रही है। मोटापे का सबसे बड़ा कारण गलत खानपान और रोजमर्रा की बुरी आदतें है। लोग अक्सर खाने के चीजों में लापरवाही बरते रहते है,

जो उन्हें धीर-धीरे मोटापे की और ले जाती है। आज हम आपको कुछ ऐसी ही आदतों के बारे में बताएंगे, जिनमें सुधार करके आप आसानी से अपना वजन कम कर सकते है।

  1. एक फूड को एक बार ही खाएं। जैसे कि अगर आपने ब्रेकफास्ट में टोस्ट खाया है तो दोपहर के खाने में कॉर्बोहाइड्रेट वालाे फूड्स चावल खाएं। इसी तरह रात को खाने को खाएं।
  2. दाल और बीन्स का ज्यादा सेवन करें। इससे लो कैलोरी, फाइबर्स और प्रोटीन की मात्रा मिलती है और वजन कम होता है।
  3. रोजाना 8-9 घंटे की नींद पूरी करें क्योंकि वजन बढ़ने का सबसे बड़ा कारण अनिद्रा है। अगर आप दिन में पर्याप्त नींद लेगे तो आपको वजन भी कंट्रोल में रहेगा।
  4. अपने वजन के हिसाब से ही पानी पीएं। अगर आपका वजन 60 किलोग्राम दिन में 2 लीटर पानी पीएं।
  5. प्रोसेस्ड फूड्स और नमक का सेवन कम कर दें। इन चीजों के सेवन से शरीर में ज्यादा पानी जमा होता है और वजन बढ़ने लगता है। पालक, केलेका सेवन करें क्योंकि इससे काफी फायदा मिलेगा।

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अनगिनत फायदों से भरपूर है पीपल का यह पत्ता

हमारे यहाँ हजारों सालों से लोग पीपल के पेड़ को लगातार पूजते आ रहे हैं। सम्पूर्ण धरती पर समस्त पेड़ों में यही एक ऐसा पेड़ है जो सबसे अधिक ऑक्सीजन छोड़ता है। यह पेड़ 24 घंटे ऑक्सीजन देने के अलावा कई प्रकार की बीमारियों से भी बचाता है।

पीपल के पेड़ के सूखे फल, जड़ और यहां तक कि इसके बीज भी हमारे शरीर के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद हैं। आइए आपको बताये इसके अनगिनत फायदों के बारे ……….

नजला-जुकाम : इसके पत्तों का चूर्ण गुनगुने पानी में थोड़ी सी मिश्री के साथ मिलाकर पीने से नजला-जुकाम तक भी ठीक हो जाता है। यदि किसी को कई सालों से जुकाम रहता है तो इस सेने से वो भी ठीक हो जाता है।

घाव भरें : चोट के घावों को जल्दी भरने के लिए पीपल के पत्तों को गर्म कर लें और चोट के घाव पर लगाएं। इससे घाव को अराम मिलेगा और जल्द ही वह भरने लगेगा।

एडिय़ां मुलायम बनाएं : पीपल के पत्तों से निकलने वाले दूध को फटी एडिय़ों पर लगाने से एडिय़ां कोमल और सामान्य हो जाती हैं।

नकसीर : गर्मी में अक्सर नक्सीर फूटने की समस्या हो जाती है। ऐसे में पीपल के ताजे पत्तों का रस निकालकर नाक में टपकाए, इससे नाक से लगातार बह रहा खून रूक जाएगा और नकसीर जैसी समस्या से आराम मिलेगा।

झुर्रियां : पीपल के पेड़ की जड़ को पानी में भिगोकर इसको पीस लें और फिर इस पेस्ट को फेस पर लगाएं। सूखने पर चेहरा धो लें। इस पैक को नियमित लगाने से चेहरे पर बढ़ती हुई उम्र की वजह से आई झुर्रियां खत्म हो जाती हैं।

दाद-खाज और खुजली : दाद-खाज दूर करने के लिए पीपल के 4 पत्तों को चबाकर सेवन करें। यदि ऐसा नहीं कर सकते हो तो पीपल के पेड़ की छाल का काढ़ा बना लें और इसे दाद व खुजली वाली जगह पर लगाएं।

पेट ठीक करें : कब्ज, गैस और पेट दर्द आदि की समस्या को दूर करने के लिए पीपल के ताजे पत्तों को जूस सुबह-शाम पीएं। इस जूस को पीने से वात और पित्त भी ठीक हो जाते है।

दमा : दमा के रोगियों के लिए पीपल वरदान से कम नहीं है। पीपल के पेड़ की छाल के अंदर के हिस्से को निकाल लें और इसे सूखा लें। सूखने के बाद इसका बारीक चूर्ण बना लें और पानी के साथ दमा रोगी को दें।

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ताली बजाने से बच्चों की हैंडराइटिंग में आता है सुधार

बॉडी को फिट रखने के लिए लोग एक्सरसाइज या फिर डाइटिंग अवश्य करते हैं लेकिन रोजाना एक छोटी सी थैरेपी करके आप खुद को कई सारी बीमारियों से दूर रख सकते है। जी हां, हम बात कर रहे है क्लैपिंग थेरेपी की। वैसे तो हम किसी को खुश करने या फिर प्रोत्साहित करने के लिए ताली अवश्य बजाते हैं

लेकिन यह सेहत के लिए बहुत अधिक फायदेमंद है। ताली बजाते समय हाथों के सारे बिंदु दब जाते हैं, जिससे कई बीमारियों से छुटकारा मिलता है।

1. ताली बजाने से रक्त संचरण बढ़ता है जिससे कोलेस्ट्रॉल कम होता है। इससे बच्चों की हैंडराइटिंग में भी सुधार आता है।

2. इससे हृदय रोग, डायबिटीज, अस्थमा और गठिया से राहत मिलती है। ताली बजाने से नसें सही तरह से काम करती है।

3. ताली बजाने से शरीर को आराम मिलता है। इससे सफेद रक्त कोशिकाएं मजबूत होती है, जो शरीर को किसी भी तरह की बीमारी से बचाने में मदद करती है।

4. इस थैरेपी के दौरान शरीर में ऑक्सीजन का फ्लो सही रहता है जिससे फेफड़ों तक ऑक्सीजन सही तरीके से पहुंचती है जिससे शरीर स्वस्थ रहता है।

5. रोजाना ताली बजाने से सर्दी जुकाम, बालों का झड़ना और शारीरिक दर्द जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। इसके अलावा शरीर के सभी अंग स्वस्थ रहते है।



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पूरी नींद नहीं लेने से एकाग्रता में आ जाती है कमी

अगर आपको बहुत देर रात तक जागने की आदत है तो बेहतर यही होगा कि आप उसे तुरंत बदल लें। देर रात तक जागने से न सिर्फ आपके स्वास्थ पर असर पड़ता है बल्कि आपको कई तरह की बीमारियों का सामना भी करना पड़ सकता है।

साथ आपके काम पर भी उसका बुरा प्रभाव पड़ता है। आइए जानते हैं देर रात तक जागने से आपको किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

चिड़चिड़ापन- इंसान के लिए 6 घंटे की नींद लेना बेहद जरूरी होती है। वहीं रात की नींद, दिन की तुलना में ज्यादा बेहतर होती है। अगर आप सही नींद नहीं लेते हैं तो आपमें जबरदस्त चिड़चिड़ापन आ सकता है जिससे आप पूरा दिन परेशान रहेंगे। इसके अलावा यह चिड़चिड़ापन इतना ज्यादा बढ़ सकता है कि आप छोटी-छोटी बातों पर परेशान होने लगेंगे और हर किसी से झगड़ते फिरेंगे।

ज्याद कॉफी मतलब सेहत को ज्यादा नुकसान- गर्मियों में आपको वे ड्रिंक्स लेने से बचना चाहिेए जिनमें कैफीन ज्यादा होता है। वहीं कॉफी में कैफीन ज्यादा मात्रा में होता है लेकिन इसका इस्तेमाल नींद भगाने के लिए भी किया जाता है।

देर रात तक जागने से न ही आप कॉफी की मदद से अपने नींद भगा पाएंगे बल्कि उल्टा कैफीन की ज्यादा मात्रा का सेवन कर बैठेंगे जो आपके स्वास्थ्य के लिए खासकर गर्मियों में हानीकारक होता है।

एकाग्रता- सही या पूरी नींद नहीं लेने से आपका ध्यान खराब होता है जिसका सीधा असर आपके काम पर भी पड़ता है। देर रात तक जागने के बाद आपको ऑफिस में काम करने में परेशानी होगी क्योंकि ऑफिस में आप काम करने के बजाए नींद से ही जूझते रहेंगे। ऐसे में बेहतर यही होगा कि अपने ऑफिस जाने से एक रात पहले आप सही से नींद लें ताकि आप अपने काम के बीच में न सो जाएं।

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बच्चों को रुक-रुक कर पेशाब आना, हो सकते हैं किडनी खराब होने के संकेत

बच्चों को रुक-रुककर पेशाब आना किडनी खराब होने के संकेत हो सकते हैं, क्योंकि यूरेटर के पास बना वॉल्व बहुत कमजोर हो जाता है। इस वजह से थोड़ी यूरिन किडनी में रुक जाती है। इसको दवा की एक डोज से ठीक किया जा सकता है। यह जानकारी डॉ. ने पीजीआई में इंटरनैशनल पिडियाट्रिक ऐंड एडलोसेंट यूरोलॉजी वर्कशॉप में दी।

उन्होंने ने बताया कि कई बच्चों में जन्म से यूरेटर और ब्लाडर के बीच में बना वॉल्व कमजोर होता है। इससे वॉल्व का रास्ता टेढ़ा हो जाता है। ऐसे में यूरीन गुर्दे में वापस चली जाती है। जिससे बच्चों को थोड़ी-थोड़ी पेशाब होती है। शुरुआत में बच्चों को इससे कोई दिक्कत नहीं महसूस होती है। इसलिए माता-पिता को भी इसकी जानकारी नहीं होती है। उन्होंने बताया कि पांच से छह वर्ष के होने के बाद लोग बच्चे के इलाज के लिए आते हैं।

  • ऐसे किया जाता है इलाज

उन्होंने बताया कि संस्थान में दूरबीन विधि से इसका इलाज किया जाता है। दवा की एक डोज वॉल्व में डाली जाती है। इससे वॉल्व मजबूत हो जाती है। इसके लिए मरीज को एक दिन भर्ती रखा जाता है। इलाज पर 45 से 50 हजार रुपये तक का खर्च आता है।

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इस थेरेपी की मदद से गर्भ में ही बच्चे को करवाया जा सकता है हर जन्मजात दोष से मुक्त

अक्सर बच्चों में कई तरह के जन्मजात दोष हमारे द्वारा देखें जाते हैं। अब डॉक्टर्स ने इसका एक पुख्ता इलाज भी निकाल लिया है। जी हां, गर्भ में ही बच्चे को हर तरह के जन्मजात दोष से मुक्त करवाया जा सकता है और इसके लिए फीटल थेरेपी बेहद ही कारगर हो रही है।

आपको बता दे कि फीटल थेरेपी गर्भवती मां, और उसकी कोख में पल रहे शिशु की देखभाल में बहुत ही ज्यादा कारगर है, और जन्मजात दोषों वाले बच्चों की बढ़ती संख्या के कारण प्रीनेटल सर्जरी एक बहुत बड़ी विकल्प बनती जा रही है।

इसी के सथ “आज फीटल थेरेपी को मां और अजन्मे बच्चे दोनों की विशेष देखभाल के लिए बेहद ही प्रभावी माना जाता है। साथ ही जन्मजात दोषों वाले शिशुओं की बढ़ रही संख्या के कारण ऐसे बच्चों के इलाज के लिए प्रीनेटल सर्जरी एक वेहतर विकल्प बनती जा रही है।

इसी के साथ गर्भधारण के 12वें सप्ताह में ही गर्भ में हो रही दिक्कतों का पता लगाया जा सकता है।

देखा जाए तो फीटल थेरेपी से जहां डॉक्टर सबसे ज्यादा खुश है वहीं गर्भवती महिलाओं को इस बात की संतुष्टि है कि अब उनके होने वाले बच्चे की दिक्कत का पता गर्भ में लगाया जा सकता है और समय रहते ही उसका इलाज ठीक से करवाया जा सकता है।

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काला नमक शरीर में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया का करता है नाश

काला नमक अपने आप में आषधिय गुणों से पूरी तरह भरपूर होता है। काले नमक में तकरीबन 80 तरीके के खनिज पर्दाथ पाए जाते है। पेट का हाजमा सुधारने में काला नमक बहुत ज्यादा उपयोगी होता है। काला नमक मोटापे, उच्च रक्तचाप, जोड़ों में दर्द जैसी तमाम बीमारियों को दूर करने में बहुत सहायक होता है।

काले नमक में सुगंध सल्फर के सॉल्ट के कारण आती है। काला नमक नाम से भले ही काला हो लेकिन इसके फायदे जानकर आप पूरी तरह हैरान हो जाएंगे।

– काला नमक हमें अच्छी नींद लाने में बहुत मदद करता है।

– जोड़ों के दर्द को ठीक करने में काला नमक काफी उपयोगी साबित होता है। गर्म पानी में काला नमक मिलाकर दर्द वाले हिस्से में सिकाई करने से दर्द से बहुत जल्द आराम मिल जाता है।

– काले नमक से बने गर्म पानी की भाप से कफ, बलगम और खांसी दूर करने में काफी सहायता मिलती है।

– काले नमक में काफी मात्रा में खनिज पदार्थ होते हैं। इनमें से कई एंटीबैक्टीरियल का काम करते हैं, जिससे हमारे शरीर में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया का नाश होता है।

– काला नमक और लाल टमाटर का मिश्रण बालों पर लगाने से रूसी शीघ्र ही गायब हो जाती है।

– दिल की बीमारी और उच्च रक्तचाप वाले मरीजों के लिए साधारण नमक की बजाय काला नमक काफी फायदेमंद है। इससे खराब कोलेस्ट्रॉल और शुगर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

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Tuesday, August 11, 2020

हल्दी के प्रयोग से अनेकों बीमारियाँ होगी कोसों दूर

हल्दी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है। यह न केवल एक मसाला है बल्कि इसमें कई औषधीय गुण प्रचूर मात्रा में होते है। हल्दी का इस्तेमाल खाने के अलावा कई बीमारियों को दूर करने में भी किया जाता हैं। रोज हल्दी का सेवन करने से हमारे शरीर को कई सेहत लाभ मिलते हैं। आज हम आपको बताते हैं कि हल्दी का प्रयोग करने से क्या-क्या लाभ होते है?

-जोड़ो का दर्द होगा दूर : वैसे तो रोजाना हम हल्दी का इस्तेमाल खाने के लिए करते है, लेकिन अगर आपको जोड़ों में दर्द होता है तो हल्दी का सेवन करने से आराम मिलता है। इसका सेवन करने से जोड़ों की अकडऩ और सूजन कम होती है।

-दिमाग की बीमारियां होगी दूर : हल्दी दिमाग की बीमारियां जैसे कि अल्जाइमर तथा डीमेंशिया का भी उपचार करती है। हल्दी दिमाग में एक ऐसे प्रोटीन को बनने से रोकती है जो यादाश्त को नुकसान पहुंचाता है।

-डायबिटीज का खतरा होगा कम : हल्दी का सेवन करने से डायबिटीज का खतरा कम हो जाता है। हल्दी शरीर से मोटे ऊतकों को हटाती है, जिससे वजन नहीं बढ़ता है।

-ब्लड सर्कुलेशन होगा मजबूत : हल्दी को ब्लड प्यूरिफायर माना जाता है। यह शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को मजबूत बनाता है।

-शरीर बनेगा सुडौल : रोजाना हल्दी वाले दूध का सेवन करने से शरीर सुडौल हो जाता है। इससे शरीर में जमा फैट्स घटता है।



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तुलसी रखती है आपके शरीर का विशेष रूप से ध्यान

भारतीय घरों में लोग तुलसी को न सिर्फ घरों में लगाते हैं, बल्कि उसकी पूजा भी करते हैं। साथ ही उसके रख-रखाव पर भी काफी ध्यान दिया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस तुलसी को लोग पूजनीय मानते हैं, वह आपके स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभदायक होती है। तो चलिए जानते हैं तुलसी से प्राप्त होने वाले स्वास्थ्य लाभों के बारे में-

  • तुलसी आपके मुंह के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखती है। काली मिर्च और तुलसी की पत्तियों की गोली बनाकर दातों के नीचे रखने से बहुत आराम मिलता है। वहीं तुलसी के रस को गुनगुने पानी में मिलाकर कुल्ला करने से गले की बीमारियां दूर हो जाती हैं। मुंह, दांत और गले के दर्द को दूर करने के लिए तुलसी के रस वाले पानी में हल्दी और सेंधा नमक मिलाकर कुल्ला करें। अगर आपके मुंह से बदबू आ रही हो तो तुलसी के कुछ पत्तों को चबा लें, दुर्गंध समाप्त हो जाएगी।
  • अगर आपके कान में दर्द हो रहा है तो आप तुलसी की पत्तियों के रस को हल्का गर्म करके उसकी दो बूंदे कान में टपकाएं। इससे आपको काफी आराम मिलेगा। वहीं, कान के पीछे की सूजन को ठीक करने के लिए तुलसी की पत्ती, अरंड की कोपलें और चुटकी भर नमक को पीसकर उसका गुनगुना लेप लगाएं। इससे कान के पीछे की सूजन खत्म हो जाती है।
  • सर्दी-खांसी होने पर तुलसी के पत्तों को चाय में डालकर पीना काफी लाभदायक माना जाता है।
    तुलसी के तेल की एक-दो बूंद नाक में टपकाने से पुराना सिरदर्द दूर हो जाता है। इसके अलावा अगर आपके सिर में जुएं हैं तो तुलसी के तेल को रोजाना बालों में लगाइए।


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इन मसालों के सेवन से स्वस्थ रहेगा आपका स्वास्थ्य

मसालों का प्रयोग हर रसोई में किया जाता है। माना जाता है कि इन मसालों की मदद से आपके भोजन का स्वाद बढ जातो है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन मसालों का प्रयोग सिर्फ भोजन का स्वाद बढाने तक ही सीमित नहीं होता।

दरअसल, एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए इन मसालों का सेवन करना भी बेहद आवश्यक होता है। तो चलिए जानते हैं इन मसालों की खासियत के बारे में-

  1. आप सब्जी में जीरे का तडका लगाते होंगे लेकिन क्या आप जानते हैं कि जीरा डाइजेशन के लिए काफी अच्छा होता है और यह डाइजेशन से जुड़ी हर समस्या का समाधान करता है। खासतौर पर यह उल्टी और दस्त में काफी फायदेमंद होता है। वहीं स्तनपान कराने वाली मां को भी इसके सेवन की सलाह दी जाती है क्योंकि यह ब्रेस्ट मिल्क को शुद्ध करने के साथ-साथ उसमें इजाफा भी करता है।
  2. हल्दी एक एंटी-बायोटिक के रूप में जानी जाती है। हल्दी से आपकी इम्यूनिटी मजबूत होती है और यह भूख भी बढ़ाती है। गुनगुने दूध में हल्दी मिलाकर पीने से गले की सूजन में राहत मिलती है साथ ही गले का संक्रमण भी ठीक होता है।
  3. वहीं इलायची से हायपर एसिडिटी में राहत मिलती है और यह सांस की बदबू भी दूर करती है। इलायची उल्टी रोकने में भी कारगर होती है। आप दूध में इलायची मिलाकर इसे अपनी डायट में शामिल कर सकते हैं।


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हाई ब्लड प्रेशर का कारण है खराब जीवनशैली

आजकल सिर्फ उम्रदराज लोग ही नहीं बल्कि बच्चे और यंग लोग भी दिल की बीमारियों और हाई ब्‍लड प्रेशर की बीमारी का बुरी तरह शिकार हो रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है खराब जीवनशैली और खानपान की बहुत खराब आदतें है।

लोग ब्लडप्रेशर को नियंत्रित करने के लिए दवाओं के साथ ही योग, एक्सरसाइज और भी न जाने कितने ही जतन करते हैं लेकिन एक बार अगर इस समस्या से इंसान ग्रसित हो जाए तो इसे ठीक कर पाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो जाता है। BP की प्रॉब्लम की वजह से ही आगे चलकर दिल की बीमारियां इंसान को बहुत ज्यादा परेशान करने लगती हैं। इन सब से निजात पाने के लिए अगर रोज सुबह एक सेब खाया जाए तो शरीर को पूरी तरह स्वस्थ रखा जा सकता है।

सेब खाने से बॉडी में इलेक्‍ट्रोलाइट बैलेंस भी रहते हैं और इसी के साथ ही इसमें मौजूद फाइबर और विटामिन शरीर में पोषक तत्वों की कमी को अछि तरह पूरा करते हैं। अगर आपको लो बीपी की समस्या है तो तुरंत एक सेब खा लें। ऐसा करने से शरीर को इंस्टेंट एनर्जी मिलेगी और आपका बीपी भी बहुत नॉर्मल हो जाएगा।



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इन नुस्खों से पाये आँखों के संक्रमण से निजात

आँखों में संक्रमण की समस्या का शिकार किसी भी आयु वर्ग का आदमी कभी भी हो सकता है। सामान्यत: यह माना जाता है कि आंखो का इन्फेक्शन वायरस, एलर्जी की वजह से ही होता है। इस दौरान कभी एक आंख या कभी कभार दोनों आंखें भी पूरी तरह लाल हो जाती है। उनमें जलन भी होने लगती है।

इस समस्या को कंजेक्टिवाइटिक भी कहते है। दरअसल यह बीमारी छूने से भी एक दूसरे तक पहुंचती है। लेकिन इन आसान उपायों से से इस समस्या से पूरी तरह निजात पाई जा सकती है।

कंजेक्टिवाइटिस की गंभीर होने पर अपनी आंखों को नमक के पानी से साफ करे। इससे आंखों में जमी सारी गदंगी बहुत बाहर निकल जाती है, इसके लिए 1 कप साफ पानी में 1 चम्मच नमक डालें और इस पानी को उबाल ले। पूरी तरह उबलने के बाद इसे ठंडा कर ले। अब इस पानी को आई ड्राप की तरह आंखों में डालें दिन में 4-5 बार इसके इस्तेमाल से इंफैक्शन विल्कुल ठीक हो जाएगी।

आंखों के संक्रमण को दूर करने के लिए दूध को बहुत हल्का गर्म कर ले। थोड़ा शहद मिलाएं और ठंडा होने के लिए कुछ देर के लिए फ्रिज में रख दें, अब इस दूध को ड्रापर की मदद आंखों में डालें।

एलोवेरा में भरपूर मात्रा में एंटीसैप्टिक गुण मौजूद होते है जो आंखों की जलन और दर्द को दूर करने में बहुत मदद करता है। इसे अपनी आंखों में इस्तेमाल करने के लिए एलोवेरा के जैल को पानी में मिलाकर ड्रापर की मदद से दिन में 3-4 बार आंखों में डालें।

एक कप पानी में एक चम्मच बोरिक एसिड मिलाकर बहुत ही अच्छी तरह उबालें। जब यह ठंढा हो जाए तो रुई के फाहे में लगाकर अपनी आंखों पर रखें और 2-3 बूंद अपनी आंखों में भी डालें। कुछ समय बाद आंखों को गुनगुने पानी से धोने के बाद साफ कपड़े से अवश्य पोछ लें।

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इन 3 फूलों की चाय के होते है अजब गज़ब फायदे

गलत खान-पान और बदलते जीवनशैली की वजह से आजकल 5 में से 3 लोग मोटापे की गंभीर समस्या से परेशान हैं। वजन को कम करने और पेट को अंदर करने के लिए लोग कई तरह के तरीके अपनाते हैं।

कुछ लोग तो पेट कम करने के लिए तरह-तरह की दवाएं, मशीनें, क्रीम-तेल और डाइटिंग का सहारा लेते हैं। इससे कई बार शरीर को अत्यधिक नुकसान पहुंचता है। ऐसे में हम आपको पेट अंदर करने के लिए एक एेसी चीज बताएंगे जिसका कोई साइड-इफैक्ट नहीं होगा। वह चीज है फूलों की चाय।

फूलों की चाय से भी कुछ ही दिनों में वजन कम होने लगता है। फूलों में कई सारे एेसे पौषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को स्वस्थ बनाने के साथ चुस्त-दुरुस्त बनाने का काम करता है। आइए आपको बताते हैं ऐसे ही 3 फूलों की चाय के बारे में और उनके फायदे।

1. चमेली की चाय
चमेली के फूल को आयुर्वेद में स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इनके फूलों की महक शरीर को स्वस्थ रखने का काम करती है। रोजाना इसकी चाय पीने से वजन कम होने लगता है। चमेली की चाय वजन कम करने के साथ ही दिल की बीमारियों और डायबिटीज को कम करने का कम करता है। इसके साथ ही चमेली की चाय पीने से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा काम होने लगती है।

2. गुड़हल की चाय
गुड़हल का फूल देखने में जितना प्यारा लगता है वह सेहत के लिए भी उतना ही फायदेमंद होती है। इसमें पाए जाने वाले विटामिन्स, मिनरल्स, फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर को कैंसर, पेट की चर्बी, डिप्रेशन, कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने का काम करता है। गुड़हल की चाय मुंह के छालों को कम करने में भी बहुत सहायक है।

3. गुलाब की चाय
गुलाब के फूलों में विटामिन ए, विटामिन बी3, विटामिन सी, विटामिन डी और विटामिन ई मौजूद होते हैं। जो लोग जल्दी से अपना वजन कम करना चाहते हैं उनको गुलाब की चाय पीना बहुत फायदेमंद होता है। गुलाब की चाय स्किन को ग्लोइंग बनाने का काम भी करती है।



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ऑफिस में इन अपाय की मदद से आलस को कर सकते है काफी हद तक दूर

नई दिल्ली: सुबह ऑफिस जाने के बाद एक समय ऐसा आता है जब हमे आलस आने लगती है और हम काम नहीं कर पाते है। खुद को ऑफिस में एक्टिव रखने के लिए आप ये तरीके अपनाएं-

  • थोड़ी देर में चले

आप लगातार बैठकर काम ना करें बल्कि हर एक घंटे में उठकर थोड़ा से इधर उधर चले और फिर वापिस आकर काम शुरू करें। देर तक बैठने से शरीर अकड़ने लगता है और आलस आता है।

  • चाय या कॉफ़ी

आपको जब आलस आने लग जाए तो आप चाय या कॉफ़ी का सेवन करें क्योकि इससे आपके अंदर का आलस कुछ हद तक दूर हो जाएगा और आप काम कर सकेगे।

  • खाना कम खाएं

अप जब ऑफिस में दोपहर का लंच करें तो उसे कम रखे क्योकि इससे ही सबसे अधिक नींद आती है। इसके वजाय आप सुबह का नाश्ता ज्यादा रखें जिससे आप दोपहर को कम खायेगे।

  • बातें करने लगे

आप ऑफिस में कुछ देर के बाद दोस्तों से दो मिनट के लिए बातें करने लग जाएँ। इससे आपका मन बहलता है और आलस दूर होता है।

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