
राजस्थान में बाल विवाह को रोकने, बालिकाओं की माध्यमिक स्तर की शिक्षा को सुनिश्चित करने तथा किशोरावस्था में गर्भधारण को रोकने के लिए उड़ान कार्यक्रम‘‘ एक 360 डिग्री नवाचार कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम से फायदा उठाकर बच्चियां शिक्षा में नए आयाम स्थापित कर रही हैं ओर अपने सपनों नई उड़ान दे रही हैं। डॉ. प्रियंवदा सिंह पॉलिसी एंड आउटरीच एडवाईजर, उड़ान परियोजना, आईपीई ग्लोबल ने बताया कि ‘‘अब तक किये गए प्रयासों का असर भी जमीनी स्तर पर नजर आने लगा है। राजकीय स्तर पर कक्षा 9 और 10 के लिए पूर्व मैट्रिक छात्रवृत्तियों के कवरेज में, आवेदनों को सही दस्तावेजों के साथ पोर्टल पर अपलोड करने में, आवेदक छात्राओं (एवं छात्रों) के बैंक खाते में समय पर राशि का ट्रान्सफर कर पाने में बहुत हद तक तेजी आयी है। इस असर के कुछ उदाहरण लाभार्थी छात्राओं की जुबानी बयान किये गए हैं जो कि फैज़ा एंव अलबुशरा जैसी छात्राओं के जीवन में हो रहे सकारात्मक प्रभावों का परिवर्तनों का समुचित प्रमाण हैं।
राजस्थान में किशोरी जनसंख्या (10-19 आयुवर्ग) 1.5 करोड़ से ऊपर है जो राज्य की कुल जनसंख्या का करीबन 22 प्रतिशत है। राजस्थान किशोर प्रजनन दर के मामले में देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है। जनगणना वर्ष 2011 के अनुसार 244,872 बालिकायें 19 वर्ष से कम उम्र में ही माँ बन चुकी थीं। कम उम्र में विवाह होने की वजह से जल्दी माँ बनने, विद्यालय छोडने, यौन शोषण तथा घरेलू हिंसा जैसी स्थितियोंं को बढ़ावा मिलता है।
मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए, चिल्ड्रन इन्वेस्टमेंट फंड फाउंडेशन (सीआईएफएफ), उड़ान परियोजना के माध्यम से राज्य को तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है, परियोजना का क्रियान्वयन
आईपीई ग्लोबल द्वारा किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य किशोरियों के यौन स्वास्थ्य में सुधार लाना एवं उनमें प्रजननीय स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के स्तर को बढ़ाना है।
इस कार्यक्रम की रणनीतियों में से एक प्रमुख रणनीति है लड़कियों की माध्यमिक स्तर की शिक्षा तक उनका विद्यालय में ठहराव सुनिश्चित करना। यह कार्यक्रम छात्रवृति वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने, छात्रवृत्ति योजनाओं पर व्यापक जन जागरूकता पैदा करने, लड़कियों की शिक्षा के सम्बन्ध में पारम्परिक मानदंडो को बदलने के लिए समुदायों को एकजुट करने, और राज्यव्यापी प्रभावी एक्शन के लिए सरकारी तंत्र की क्षमता वृद्धि करने पर केन्द्रित है।
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