Thursday, September 27, 2018

एडल्टरी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, पति पत्नी का मालिक नहीं है

नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट आजकल कई सारे अहम् मुद्दों में अपना फैसला सुना रही है| जहाँ बीते दिन आधार पर फैसला आया तो वही अब एडल्टरी कानून पर फैसला आया है| आईपीसी की धारा 497 पर अपना फैसला अगस्त में सुनाने के बाद इसे सुरक्षित रख लिया था जिसे आज पढ़ा गया| गुरुवार को चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले पर फैसला सुनाया| फैसला पढ़ते वक्त चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि पति पत्नी का मालिक नहीं है| महिला की गरिमा सबसे ऊपर है और उसका अपमान नहीं किया जा सकता है| महिला के सम्मान के खिलाफ आचरण गलत है| सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 497 महिला और पुरुष में भेदभाव दर्शाता है| सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि आईपीसी की धारा 497 असंवैधानिक है|


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व्यक्ति का सम्मान पवित्रता से अधिक जरूरी– सुप्रीम कोर्ट ने कहा की “एक व्यक्ति का साम्मान समाज की पवित्रता से बढ़कर नहीं है और किसी को आप अपने हिसाब से जीने के लिए नहीं कह सकते है| आपको बता दे की धारा 497 के तहत एक महिला पुरुष के आधीन है जबकि सुप्रीम कोर्ट ने आज इस फैसले को बदल दिया है| सुप्रीम कोर्ट ने कहा की विवाह के बाद अलग सम्बन्ध बनाना गलत नहीं है लेकिन महिला और पुरुष को अपने रिश्तो को लेकर ईमानदार होना जरूरी है| इस फैसले में कहा गया की एडल्टरी अपराध नहीं है लेकिन यह तलाक की वजह हो सकता है|

आपको बता दे की धारा 497 व्यभिचार की धारा थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खत्म कर दिया है|



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