आजकल के समय में बहुत सी बीमारियां हमारे सामने आ रही हैं जिससे विज्ञान भी बहुत हैरान हैं क्यों कि विज्ञान को इन बीमारियों के बारें में अभी तक पूर्ण जानकारी नहीं हैं। लेकिन जब ये बीमारियां किसी भी शरीर में दस्तक देती हैं तो इनसे जुड़े कई संक्रमणों का पता चलता हैं। विज्ञान के अनुसार ये बीमारियां किसी खास संक्रमण के सम्बन्ध में आने से ही होती हैं।
कई बीमारियां की जड़ तो आम बीमारी जैसे डायबिटीज और ब्लड़ शुगर होती हैं। इन सबके अलावा दिल का रोग भी इनमें जिम्मेदार हैं। वर्तमान समय में अधिक केस सामने आये हैं जिनमें गुर्दे की बीमारी का पता चला हैं। एक अनुमान के अनुसार 17फीसदी शहरी भारतीय गुर्दों के रोग से पीड़ित हैं।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष ने कहा कि गुर्दो के क्षतिग्रस्त होने का पता लगाने के लिए पेशाब की जांच और गुर्दे कैसे काम कर रहे हैं, इसके लिए रक्त की जांच अवश्य की जाती है। पेशाब की जांच से एल्बुमिन नामक प्रोटीन का पता चलता है, जो सेहतमंद गुर्दो में मौजूद नहीं होता। 60 से कम जीएफआर गुर्दो के गंभीर रोग का संकेत होता हैं।
15 से कम जीएफआर गुर्दो के फेल होने का प्रमाण होता है। वे बताते हैं कि गुर्दे की सेहत अच्छी बनाए रखने के लिए शरीर में पानी की उचित मात्रा रखनी होती है. इससे गुर्दो की लंबी बीमारी का खतरा बहुत ही कम हो जाता है। गुर्दो के रोग पाचनतंत्र के विकार और हड्डियों के रोग से जुड़े होते हैं।
इनसे जुड़ी बीमारियों का लक्षण भी शरीर में अन्य बीमारियां पैदा करता हैं। गुर्दो से सोडियम, यूरिया और जहरीले तत्व साफ हो जायें इसके लिए पानी का सेवन प्रतिदिन दो से ढाई लीटर पानी का पीना चाहिए। इसके साथ ही खानें में नमक का उपयोग कम से कम करें। नियमित व्यायाम करें तथा उचित और सही मात्रा में खाने का सेवन करें। बाहर का खाना ना खायें। जिससे गुर्दो का रोग का खतरा काफी समय तक कम हो जाता हैं।
from हेल्थ – Navyug Sandesh http://bit.ly/2XfeMbN
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