
वर्तमान समय में, माता-पिता इतने व्यस्त होते हैं कि बच्चे को समय ही नहीं दे पाते। ऐसे में वह उन्हें खुश रखने के लिए उनकी हर बात मानने लग जाते हैं। धीरे-धीरे यह आदत बच्चों के स्वभाव में शुमार हो जाती हैं और बच्चे हर बात के लिए कोई न कोई डिमांड रखते हैं।
अगर आपका बच्चा भी ऐसे करता है, तो थोड़ा सतर्क हो जाइए। बच्चे से हर समय नेगोशिएट करना उसके लिए सही नहीं है। अगर आप बच्चे से नेगोशिएट कर रहे हैं तो यह अवश्य देखें कि यह किस हद तक सही है-
कभी भी बच्चों की डिमांड को एकदम से पूरा न करें। अगर वह किसी काम को करने के लिए आपसे डिमांड कर रहा है तो उसे खुद को ब्लैकमेल करने का मौका न दें। मसलन, अगर वह होमवर्क करने के लिए आपसे साइकिल या किसी खिलौने की डिमांड कर रहा है तो उसे बताएं कि इससे स्कूल में उसे ही डांट पड़ेगी।
आप बच्चे की मनपसंद चीज उसे रिवाॅर्ड के रूप में दे सकते हैं। मसलन, वह आपसे नहीं कहेगा कि जब आप उसे लैपटाॅप या फोन लाकर देंगे, तभी वह परीक्षा में अच्छे अंक लाएगा।
बल्कि बच्चे की अच्छी परफार्मेंस के बाद आप खुद अपनी मर्जी से उसे लैपटाॅप या फोन लाकर दें और उसे बताएं कि यह उसके कड़े परिश्रम का प्रतिफल है। इस प्रकार वह अगली बार भी मेहनत करने के लिए प्रेरित होगा।
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