
भीमाकोरेगांव की 202वी सालगिरह पर लाखो की सख्यां में महाराष्ट्र के पुणे जिले के पैरने गांव मे जयस्तंभ स्मारक पर लोग एकत्रित हुए। युद्ध स्मारक पर लोग सम्मान प्रकट करने के लिए आते है। देश के हर एक राज्य से लोग यहां पहुचते है। औऱ अ्पने योद्धओं को सम्मान प्रकट करते है।
कहा जाता है कि ब्रिटिश राज में 500 महार सैनिको ने 25000 हजार पेशवाओं को इस युद्ध में पराजित किया था। लोगो का मानना है कि इस युद्ध में महार लोगों ने पेशवाओं की जाति के खिलाफ युद्ध लड़ा था। उस समय दलितों की दशा काफी दयनीय होती था। दलित जाति के लोगों को उच्च जाति के लोगों से काफी अपमान सहना पड़ता था। दलित जाति के लोगों को पढ़ने की आजादी नही थी। इसलिए इस युद्ध को दलित जाति के लोग पेशवाओ की जाति विरोधी युद्ध मानते है। 1927 को बाबा साहेब भीम राव अबेड़कर ने जयस्तभं का दौरा किया था औऱ महारों पर सेना में भर्ती पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ भाषण दिया था।
आज से दो साल पहले 200 वी. वर्षगांठ पर वहां काफी हिंसा भड़क गई थी। जिसमें पुलिस और आमजन लोगों को काफी चोटे आई थी । और व्यक्ति की मौत हो जाती है। मौके की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री ने जांच के लिए आयोग का गठन किया था।
पुलिस सूत्रो के अनुसार यहां पहुचने वाले लोगों की सख्यां में हर साल बढ़ोतरी होती है। हिंसा के अगले साल यानी 201 वी. सालगिरह पर यहां पहुचने वालों की सख्यां 10 लाख तक पहुच गई है। पुलिस के मुताबिक हर साल नए लोग जो पहली बार जयस्तभं का दौरा करने आते है। उनकी सख्यां ज्यादा होती है। सुरक्षा को लेकर वहां इस बार पूरे पुख्ता इंतजाम किए गए है।
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