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खूब थके हों और झपकी आ जाए तो आप खुद तरोताजा हो जाते हैं। लेकिन ऐसी दशा में पूरी नींद न लेना या लगातार टुकड़ों में सोना सेहत लिए ख़राब है। एक स्टडी की मानें तो बार-बार नींद टूटने से शरीर पर बहुत बुरा असर पड़ता है|
वैसे लंबी और चैन की नींद सौभाग्यशाली लोगों को ही मिलती है, सभी के लिए एक बार में 7-8घंटे सोना पॉसिबल नहीं है। नींद की कमी से कई सारी बीमारियां भी होने लगती हैं। जो लोग एक बार में भरपूर नींद नहीं लेते हैं या फिर देर रात तक जगने के बाद सोते हैं उनके मन में अक्सर यह ख्याल आता है कि क्यों न टुकड़ों में नींद को पूरी कर ली जाए।
ऐसे में अमेरिका की जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपनी स्टडी में दो तरह की नींद का अध्ययन किया। बिना व्यवधान की लंबी नींद और दूसरी कम समय के लिए टुकड़ों में ली गई नींद। इस स्टडी में 60 सेहतमंद पुरुषों को शामिल किया गया और एक लैबरेटरी में रखा गया। इनमें कुछ लोगों को बार-बार जगाया गया।
शोध का परिणाम
वैज्ञानिकों ने इस शोध में यह पाया कि पहली रात के बाद दोनों ही समूह के प्रतिभागियों को थकान थी। बाद की रातों में टुकड़ों में सोने वाले समूह की अपेक्षा देर रात के बाद शांति से सोने वाले समूह के लोगों का मूड 30 प्रतिशत फ्रेश था। यह भी पता चला कि टुकड़ों में सोने वाले लोग अगले दिन ज्यादा थके और सुस्त दिखे |
दिन में सोना खतरनाक
स्लीप जर्नल में पब्लिश हुए एक दूसरे शोध की मानें तो जो लोग दिन में 6 घंटे की नींद लेते हैं, उन्हें रात में सात घंटे रोज नींद लेने वालों की अपेक्षा बीमारी का खतरा चार गुना अधिक रहता है।
याद्दाश्त कमजोर होना
कम नींद लेने का प्रभाव माइंड पर भी पड़ता है और माइंड सही तरीके से काम नहीं करता। इसकी वजह से पढ़ने, सीखने व निर्णय लेने की क्षमता भी कमजोर हो जाती है।
भूख ज्यादा लगना
टुकड़ों में नींद लेने से मेटाबॉलिज्म कमजोर हो जाता है। कम नींद लेने के कारण हॉर्मोन में असंतुलन भी हो जाता है जिससे कारण ज्यादा भूख लगती है। इसके कारण ही अच्छी नींद न लेने वाले लोगों को पेट भरने का आभास लेट से होता है। इसलिए टुकड़ों में नींद लेने के बजाय एक साथ लंबी नींद लेने की कोशिश कीजिये ।
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