विधि आयोग यानि कानून आयोग की तरफ से जारी परामश पत्र में कहा गया है कि फिलहाल भारत में समान नागरिक संहिता (UCC, uniform civil code) की जरूरत नहीं है। जुलाई, 2016 में कानून मंत्रालय ने विधि आयोग को UCC की व्यावहारिकता और गुंजाइश पर अध्ययन करने को कहा था। न्यायमूर्ति बीएस चौहान की अध्यक्षता वाले विधि आयोग की ओर से कानून मंत्रालय को दिए परामर्श पत्र में कहा गया है कि यूसीसी की अभी जरूरत नहीं है।
भारत में पारिवारिक कानून सुधारों पर इस परामर्श पत्र में सभी पारिवारिक कानूनों, धर्मनिरपेक्ष या व्यक्तिगत के भीतर कई प्रावधानों पर चर्चा की गई है, और संभावित संशोधन और ताजा अधिनियमों के रूप में कई बदलावों का सुझाव दिया गया है।
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परामर्श पत्र में पारिवारिक कानून में सुधार के लिए सामान्य सुझावों के रूप में, ‘कोई गलती नहीं’ तलाक के लिए नए आधारों की शुरूआत पर चर्चा की गई है, जिसमें विवाह और रखरखाव के प्रावधानों में समान परिवर्तन, विवाह के भीतर अलग-अलग व्यक्तियों के अधिकार, पंजीकरण के लिए तीस दिन की अवधि विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह; विवाह के लिए सहमति की उम्र में अनिश्चितता और असमानता, विवाह के अनिवार्य पंजीकरण, रूपांतरण पर बड़े पैमाने पर आदि शामिल हैं।
परामर्श पत्र में हिंदू कानून के तहत अन्य मुद्दों के साथ वैवाहिक अधिकारों के पुनर्गठन जैसे प्रावधानों के साथ समस्याओं पर चर्चा की गई है। परामर्श पत्र में मुस्लिम कानून के तहत विरासत कानून में सुधार पर मुस्लिम कानून के संहिताकरण के माध्यम से सुधार पर चर्चा की गई है।
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