
भारत में कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या 1000 तक पहुंच चुकी है। इस वक्त कुल 1005 मरीज भारत में है। इनमें से 88 लोगों का सफलतापूर्वक इलाज किया जा चुका है यह ठीक हो गए हैं, और 24 लोगों की मौत हुई है। अगर पूरी दुनिया में कोरोना के मरीजो की बात की जाए तो यह संख्या 649904 है। इनमें से 30000 लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा कोरोना से जुड़े मामले सामने आए है। सिर्फ अकेले महाराष्ट्र से 210 मामले सामने आए हैं। जिसमें से 5 लोगों की मौत हुई है और 25 लोग इलाज के दौरान ठीक हो चुके हैं।
केंद्र सरकार कह रही है कि कोविड-19 से निपटने के लिए भारत सरकार काफी सक्रिय है। डब्ल्यूएचओ ने भारत सरकार के द्वारा लिए गए आपातकालीन लॉकडाउन की घोषणा की सराहना भी की है। भारत सरकार द्वारा लोगों के वीजा को निलंबित कर दिए गए हैं। हवाई मार्ग से भारत आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही थी। अब हवाई उड़ानों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
संपूर्ण रूप से लॉक डाउन के बाद भी लोगों का पलायन नहीं रुक पा रहा है। इस समय लोगों का पलायन ही सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। इसी बीच ए आई एम आई एम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के सरकार में फंसे हुए प्रवासियों के लिए कुछ नहीं कर पा रही है। उनकी जिंदगी बदत्तर होती जा रही हैं ।
दिल्ली में प्रवासियों को बसों में भरकर तेलंगना भेजा जा रहा है। क्या तेलंगना में फंसी प्रवासियों को भी यूपी सरकार अपने पास वापस लेगी? यह बहुत बड़ा सवाल और समस्या बना हुआ है। लॉक डाउन के बाद देशभर में मजदूर अपने-अपने घर जाने के लिए मजबूर है। ऐसे में इनका पलायन बहुत बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। मजदूरों में रिक्शा चालक, फैक्ट्री के कर्मचारी है जो अपने अपने गांव की तरफ हजारों की संख्या में लौट रहे हैं। और इसे नियंत्रित कर पाना मुश्किल होता जा रहा है।
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