
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ अपनी सरकार बचाने की हर मुमकिन कोशिश करते दिख रहे है। लेकिन इस पुरे घटनाक्रम पर बारीकी से नज़र डाली जाए तो समझ आता है की कमलनाथ अब एक हारी हुई बाज़ी जीतने की नाकाम कोशिश कर रहे है। इस सियासी संग्राम में बीजेपी का पलड़ा काफी भारी दिख रहा है जिसकी काट ना कांग्रेस आलाकामन के पास है और न ही मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास ही इसका कोई तोड़ है।
मध्य प्रदेश में अपनी सरकार बचाने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ पूरी कोशिश कर रहे है। शनिवार शाम को मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कई अन्य बीजेपी नेताओं ने राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात कर बजट सत्र से पहले फ्लोर टेस्ट की मांग की थी। इसके बाद, राज्यपाल लालजी टंडन ने शनिवार रात आदेश जारी कर दिए की सोमवार को बजटसत्र के पहले दिन विधानसभा में विश्वास मत पर वोटिंग होगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है की कमलनाथ सरकार का 16 तारीख को गिरना लगभग तय है। कांग्रेस आलाकामन भी इस बात से भलीभांति परिचित है की प्रदेश कांग्रेस के पास फ्लोर टेस्ट में पास होने के लिए पर्याप्त संख्याबल नहीं है। ज्योतिरादितीय सिंधिया के समर्थन में कांग्रेस के पहले ही 22 विधायक अपना इस्तीफा दे चुके है, जिनमे से 6 राज्य में मंत्री पद पर थे। विधानसभाध्यक्ष एनपी प्रजापति इन 6 राज्य मंत्रियों को मंजूर कर चुके है।
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