
कोरोना वायरस की भारत में बढ़ते हुए संक्रमण को देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों जनता कर्फ्यू और लॉक डाउन की जनता से अपील की। भारत सरकार ने इसे ही कोरोना वायरस का सबसे बड़ा समाधान बताया।
इससे सड़कों में भीड़ कम हुई हैं। धुआं उत्सर्जित करने वाली कंपनियां भी बंद हो चुकी है। साथ ही गाड़ियों में भी कमी आई है गाड़ियां ना के बराबर सड़कों में दौड़ रही है। इससे वायु प्रदूषण में कमी नापी गई है। लोग खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं। वायु प्रदूषण कम हो रहा है। इस अवधि के दौरान हवा में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का स्तर बहुत निम्न मापा गया गया है। जो साल 2017 के बाद पहली बार सामने आया है।
नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के इस बड़े स्तर में गिरावट से पता चलता है कि शहर की पूरी परिवहन व्यवस्था जीवाश्म ईंधन पर ही पूरी तरह से निर्भर है।
वायु प्रदूषण पर काम करने वाले भारतीय संस्था सफर ने भी प्रदूषण में कमी बताई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का प्रमुख स्त्रोत वाहन और कारखानों से निकलने वाले धुएं होते हैं। इससे भारत में बहुत अधिक संख्या में चाइल्ड अस्थमा और अस्थमा का कारण बनता है। जिससे हर साल काफी संख्या में मौत होती है। कोरोना वायरस के कहर ने भारत में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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