
प्रोस्टेट, मूत्राशय और गुर्दा के कैंसर जैसे गंभीर बीमारी के मरीजों में खुदकुशी करने का खतरा लगभग पांच गुना अधिक होता है। भारतीय मूल के एक वैज्ञानिक सहित अनुसंधानकर्ताओं के एक नए सर्वेक्षण में इस बात का दावा किया गया है।
उन्होंने अपने विश्लेषण में साथ ही यह भी दिखाया है कि कैंसर के मरीजों के आत्महत्या करने की आशंका आम लोगों से लगभग तीन गुना अधिक होती है।
कैंसर का पता चलने और उसके उपचार के दौरान गंभीर मानसिक तनाव इसके प्रमुख कारकों में से एक है। कैंसर के तकरीबन पांच से 25 प्रतिशत मरीज अवसाद के शिकार हो जाते हैं और कई अन्य पोस्ट- ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसॉर्डर(PTSD) से प्रभावित हो जाते हैं।
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