Saturday, August 8, 2020

ये घरेलू आयुर्वेदिक उपचार देगा हिचकी से राहत

हमारा शरीर एक ऐसी मशीन है जिसमें कई प्रकार की क्रियाएं होती रहती है इसमें एक है हिचकी का आना। हिचकियाँ सामान्यता फ्रेनिक स्नायु के उत्तेजन से डायफ्रॉम नामक पेशी के संकुचित होने के फलस्वरूप आती हैं। स्नायु का यह उत्तेजन भावनात्मक स्थिति, अधिक भरे हुए अमाशय या तेज मिर्च मसालेयुक्त आहार से हो सकती है। इसके लक्षण यह – स्नायविक कारणों या फ्रेनिकस्नायु के प्रदाह से होने वाली हिचकियाँ लम्बे समय तक आती रहती हैं।

इसके लिए यह है घरेलू आयुर्वेदिक उपचार

इसके लिए अगर उबले चावलों में घी डालकर खाएँ हिचकी से छुटकारा पाया जा सकता है। सेंधा नमक घी या पानी में मिलाकर सूँघें ,इससे भी छुटकारा मिलेगा। नीबू की ताजी पत्तियाँ चबाकर चूसें ,तो यह भी काम करेगा। थोड़ी मात्रा में शहद चाटें, सोंठ और छोटी हरड़ को पानी में घिसकर इसका एक चम्मच गाढ़ा लेप एक कप गुनगुने पानी में घोलकर पिलाएँ। मुलेठी का चूर्ण शहद के साथ चाटने से हिचकी का आना बंद होता है।

शहद के प्रयोग से पुरानी हिचकी बन्द हो जाती है। बकरी के दूध में अदरक का रस मिलाकर पीने से हिचकी आना बंद हो जाता है। हिचकी यदि बन्द न हो रही हो तो मूली के पत्ते चबाएँ। हिचकी तुरन्त बन्द हो जाएगी। बच्चों को हिचकी लगने पर अदरक का रस, काली मिर्च तथा नींबू का रस मिला कर चटाएँ। हिचकी बन्द हो जाएगी। हींग की धूनी देने से हिचकी चलना बन्द होता है।

इन घरेलू नुस्खों से हम हिचकी से छुटकारा पा सकते है।

हमारा शरीर एक ऐसी मशीन है जिसमें कई प्रकार की क्रियाएं होती रहती है इसमें एक है हिचकी का आना। हिचकियाँ सामान्यता फ्रेनिक स्नायु के उत्तेजन से डायफ्रॉम नामक पेशी के संकुचित होने के फलस्वरूप आती हैं। स्नायु का यह उत्तेजन भावनात्मक स्थिति, अधिक भरे हुए अमाशय या तेज मिर्च मसालेयुक्त आहार से हो सकती है। इसके लक्षण यह – स्नायविक कारणों या फ्रेनिकस्नायु के प्रदाह से होने वाली हिचकियाँ लम्बे समय तक आती रहती हैं।

इसके लिए यह है घरेलू आयुर्वेदिक उपचार

  • इसके लिए अगर उबले चावलों में घी डालकर खाएँ हिचकी से छुटकारा पाया जा सकता है।
  • सेंधा नमक घी या पानी में मिलाकर सूँघें ,इससे भी छुटकारा मिलेगा।
  • नीबू की ताजी पत्तियाँ चबाकर चूसें ,तो यह भी काम करेगा।
  • थोड़ी मात्रा में शहद चाटें, सोंठ और छोटी हरड़ को पानी में घिसकर इसका एक चम्मच गाढ़ा लेप एक कप गुनगुने पानी में घोलकर पिलाएँ।
  • मुलेठी का चूर्ण शहद के साथ चाटने से हिचकी का आना बंद होता है।
  • शहद के प्रयोग से पुरानी हिचकी बन्द हो जाती है।
  • बकरी के दूध में अदरक का रस मिलाकर पीने से हिचकी आना बंद हो जाता है।
  • हिचकी यदि बन्द न हो रही हो तो मूली के पत्ते चबाएँ। हिचकी तुरन्त बन्द हो जाएगी।
  • बच्चों को हिचकी लगने पर अदरक का रस, काली मिर्च तथा नींबू का रस मिला कर चटाएँ। हिचकी बन्द हो जाएगी।
  • हींग की धूनी देने से हिचकी चलना बन्द होता है।

इन घरेलू नुस्खों से हम हिचकी से छुटकारा पा सकते है।

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